
इस्लामाबाद शिया मस्जिद हमला: कभी-कभी दूर की आग की लपटें इतनी भयानक होती हैं कि उनका ताप सीमाओं को लांघकर दिलों में आक्रोश की चिंगारी भर देता है। आज कश्मीर की धरती पर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुए शिया मस्जिद हमले के विरोध में जम्मू और कश्मीर के बारामूला जिले में जोरदार प्रदर्शन हुआ।
इस्लामाबाद शिया मस्जिद हमला: मानवता के खिलाफ अपराध और व्यवस्था पर सवाल
Islamabad Shia Mosque Attack: जम्मू और कश्मीर के बारामूला जिले के हंजीवेरा क्षेत्र स्थित श्रीनगर-बारामूला राष्ट्रीय राजमार्ग पर आज शिया समुदाय के स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद में हुए आत्मघाती हमले के विरोध में आयोजित किया गया, जिसमें शिया समुदाय के कई निर्दोष लोगों की जान गई और अनेक लोग घायल हुए। इस्लामाबाद की इस भयावह घटना ने घाटी के शिया समुदाय में गहरा दुख और आक्रोश पैदा कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर विशाल जुलूस निकाला तथा ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि पाकिस्तान में शिया समुदाय पर हमले कोई नई बात नहीं हैं, बल्कि पिछले दस से पंद्रह वर्षों से इस तरह की हिंसक घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं। उनका स्पष्ट आरोप था कि वहां प्रशासन और सरकार अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगातार नाकाम रहे हैं। पाकिस्तान में शिया समुदाय की सुरक्षा एक बड़ा प्रश्न चिन्ह बन गई है।
एक प्रदर्शनकारी ने भावुक होते हुए कहा कि वे इस अमानवीय हमले की कड़ी निंदा करने और मृतकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए एकत्रित हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी धर्म स्थल पर प्रार्थना कर रहे लोगों को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ एक अक्षम्य अपराध है। उनका यह भी कहना था कि कुछ ताकतें शिया समुदाय को डराकर खत्म करना चाहती हैं, लेकिन समुदाय अपने अस्तित्व और आस्था की रक्षा के लिए हमेशा डटा रहेगा।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने अपने नारों के पीछे के तर्क को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ का नारा वहां के आम और निर्दोष लोगों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह नारा वहां की व्यवस्था, प्रशासन और सरकार के खिलाफ है, जो देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को संभालने में असफल रही है और आतंक से जुड़ी घटनाओं पर रोक लगाने में भी सफल नहीं हो पाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आम जनता को ही हिंसा से सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रदर्शनकारियों ने यह तीखा सवाल उठाया कि आखिर कैसी सोच किसी व्यक्ति को इस बात के लिए प्रेरित करती है कि वह नमाज पढ़ रहे लोगों के बीच जाकर अपने शरीर पर बंधे बम को विस्फोट कर दे। उन्होंने कहा कि मस्जिद में घुसकर बच्चों, महिलाओं और निर्दोष लोगों का रक्त बहाना किसी भी धर्म या विचारधारा से सही नहीं ठहराया जा सकता है। इस तरह की घटनाएं समाज में डर और नफरत फैलाती हैं और पाकिस्तान में शिया समुदाय की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा करती हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पाकिस्तान में कड़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था, जांच एजेंसियां सक्रिय
इस बीच, पाकिस्तान में हुए इस भयावह हमले को लेकर वहां सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। पूरे देश में सतर्कता बढ़ा दी गई है और जांच एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। अधिकारियों के हवाले से आई खबरों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है, जबकि एक सौ से अधिक लोग घायल बताए गए हैं। यह विस्फोट तारलाई क्षेत्र स्थित खदीजा तुल कुबरा इमामबाड़ा में हुआ था। पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री ने मीडिया को बताया कि हमलावर अफगान नागरिक नहीं था, लेकिन जांच से यह पता चला है कि उसने अफगानिस्तान की कई यात्राएं की थीं, जिससे जांच को कुछ महत्वपूर्ण दिशा मिली है। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि आतंकवाद किस तरह से सामान्य जीवन और आस्था स्थलों को निशाना बना रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





