

सरकार ने बड़ा फैसला किया। अब अगर तीस दिनों तक मुखियाजी एक्टिव नहीं हुए तो स्वतं: इसके बाद उपमुखिया जी प्रभार में आ जाएंगें। यह फैसला पंचायती राज विभाग ने लिया है। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को इस मामले की जानकारी दे दी गई है।
जानकारी के अनुसार, मुखिया के रूप में कार्य करने के लिए उप मुखिया को कोई आदेश प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। उप मुखिया से सूचना मिलते ही कार्यपालक पदाधिकारी इसकी सूचना जिला पंचायत राज पदाधिकारी को देंगे।
अब मुखिया की अनुपस्थिति में उनके कार्यों और दायित्वों को लेकर जिलाधिकारियों को नया निर्णय से संबंधित निर्देश दिया है। पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मिहिर कुमार सिंह ने जिलाधिकारियों से कहा है कि कोई मुखिया अपने कर्तव्य से 30 दिनों से अधिक तक अनुपस्थित रहते हैं तो 31वें दिन मुखिया का प्रभार उसी ग्राम पंचायत के उप मुखिया के पास स्वत: चला जाएगा।
जिला पंचायत राज पदाधिकारी की ओर से प्रभारी मुखिया को वित्तीय लेनदेन के लिए डोंगल बनवाया जाएगा। कोई मुखिया 30 दिनों में जमानत लेकर आ जाए तो अनुपस्थित नहीं माना जाएगा। उप मुखिया, मुखिया के कार्यों का निष्पादन तब तक करते रहेंगे जब तक अनुपस्थित मुखिया आकर अपना कार्य आरंभ न कर दें।
मुखिया महासंघ के आंदोलन के बीच पंचायती राज विभाग ने शुक्रवार को सख्त आदेश जारी कर दिया है। मुखिया अस्वस्थता अथवा अन्य कारणों से 30 दिनों से अधिक समय तक अनुपस्थित रहते हैं तो पंचायत सचिव को कारण सहित मुखिया की अनुपस्थिति की लिखित
ससमय सूचना संबंधित कार्यपालक पदाधिकारी, पंचायत समिति को देनी होगी। इसके बाद 31वें दिन उप मुखिया स्वत: मुखिया का प्रभार ग्रहण कर लेगा और इसकी लिखित सूचना संबंधित कार्यपालक पदाधिकारी, पंचायत समिति को देगा।


