
बिहार नई रेल लाइन: लंबे इंतज़ार के बाद बिहार के मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। सीतामढ़ी से निर्मली तक प्रस्तावित 188 किलोमीटर लंबी रेललाइन परियोजना को अब गति मिल गई है। रेलवे ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के फाइनल अलाइनमेंट सर्वे के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे सीमावर्ती इलाकों के विकास को एक नई दिशा मिलने की पूरी उम्मीद है।
इन क्षेत्रों को पहली बार मिलेगी रेल सुविधा
यह बिहार नई रेल लाइन कई ऐसे क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी, जहाँ के लोग अब तक रेल यात्रा के लिए दूर-दराज के स्टेशनों पर निर्भर थे। सीतामढ़ी जिले के बथनाहा, सोनबरसा, परिहार, सुरसंड, भिट्ठामोड़ और चोरौत जैसे प्रखंड पहली बार सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। अब इन इलाकों के लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए सीतामढ़ी, बाजपट्टी या पुपरी जाने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बचेगा।
विस्तृत रूट प्लान और नए स्टेशन
यह प्रस्तावित रेलखंड सीतामढ़ी जंक्शन से शुरू होकर निर्मली तक जाएगा, जिसमें कई महत्वपूर्ण स्थान शामिल होंगे। नए स्टेशनों का निर्माण भी इस रूट पर प्रस्तावित है।
- सीतामढ़ी जंक्शन
- अमघट्टा
- भगवतीपुर
- भैरोकोठी
- बथनाहा
- माधोपुर
- दिग्घी
- बेला
- परसाकला
- सोनबरसा
- परिहार
- सुरसंड
- भिट्ठामोड़
- चोरौत
- जयनगर
- निर्मली
परियोजना का इतिहास और वर्तमान स्थिति
इस परियोजना को वर्ष 2008-09 में स्वीकृति मिली थी, लेकिन विभिन्न कारणों से 2019 में इस पर रोक लगा दी गई थी। लंबे इंतजार के बाद रेलवे बोर्ड ने इसे पुनः शुरू करने की अनुमति दी है, जिसके बाद अब सर्वे का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य अभियंता (निर्माण) महबूब आलम ने राज्य के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव को पत्र लिखकर बताया है कि सर्वे की निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उम्मीद है कि सर्वे में लगभग चार महीने लगेंगे, जिसके बाद निर्माण कार्य को गति मिलेगी।
बिहार नई रेल लाइन: क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम
इस रेललाइन के शुरू होने से न केवल स्थानीय लोगों को बेहतर और सस्ती यातायात सुविधा मिलेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। किसान अपनी उपज को बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंचा पाएंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। व्यापारियों और छोटे उद्योगों को भी इस कनेक्टिविटी से काफी लाभ होगा।
यह मिथिला रेल परियोजना नेपाल सीमा से सटे इलाकों को भी जोड़ेगी, जिससे दोनों देशों के लोगों को आवाजाही में सुविधा होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी इससे बढ़ावा मिलेगा। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और आम यात्रियों को कम समय में सुरक्षित और किफायती यात्रा का विकल्प मिलेगा। कुल मिलाकर, यह परियोजना मिथिला रेल और सीमांचल क्षेत्र के लिए एक गेमचेंजर साबित होगी।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







