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Bihar News: बिहार निर्यात पर भू-राजनीतिक तनाव का साया, मखाना, मसाले, फल, सब्जियां और हस्तशिल्प उत्पादों पर गहराया संकट, कारोबार की बढ़ी चिंता

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बिहार निर्यात: क्या आप जानते हैं कि भू-राजनीतिक तनाव अब बिहार के मखाना और हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए भी मुसीबत बन गया है? लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते जोखिमों के कारण जहाजरानी मार्ग बाधित हो गए हैं, जिससे माल ढुलाई की लागत आसमान छू रही है और शिपमेंट में देरी हो रही है। इस वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर अब बिहार के निर्यात क्षेत्र पर दिखने लगा है।

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बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियाँ और बिहार निर्यात पर असर

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संघर्ष बिहार के निर्यात क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। मखाना और हस्तशिल्प से जुड़े व्यापारियों को माल ढुलाई लागत में भारी वृद्धि और शिपमेंट में लगातार देरी का सामना करना पड़ रहा है। व्यावसायिक संगठनों का कहना है कि बिहार बड़ी मात्रा में मखाना, मसाले, फल, सब्जियां और हस्तशिल्प उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करता है। हालांकि, प्रमुख वैश्विक समुद्री मार्गों पर बढ़ते सुरक्षा जोखिमों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह बाधित कर दिया है। निर्यातकों ने बताया कि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा खतरों के कारण कई शिपिंग कंपनियों को पारंपरिक मार्गों से बचने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वे अब दक्षिणी अफ्रीका में केप ऑफ गुड होप के माध्यम से जहाजों को भेज रहे हैं। इस लंबे मार्ग के कारण परिवहन लागत में भारी वृद्धि हुई है और निर्यातकों के लिए डिलीवरी का समय भी बढ़ गया है। नेहा आर्य, एक अंतर्राष्ट्रीय निर्यात कंपनी की निदेशक, ने बताया कि बिहार सालाना लगभग 15,000 से 20,000 टन मखाना निर्यात करता है, जिसका अनुमानित व्यापार मूल्य 330 करोड़ रुपये से 415 करोड़ रुपये के बीच है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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माल ढुलाई लागत में बेतहाशा वृद्धि

आर्य के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम बिहार के मखाना निर्यात के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में से हैं। निर्यातकों का कहना है कि हाल के महीनों में माल ढुलाई शुल्क में लगभग दो से ढाई गुना की वृद्धि हुई है। डिलीवरी के समय पर भी इसका असर पड़ रहा है, जिसमें 15 से 30 दिनों की देरी हो रही है। व्यापारियों ने बताया कि चल रही शिपिंग चुनौतियों के कारण कई पहले से पुष्टि किए गए निर्यात आदेश भी बाधित होने लगे हैं। इस स्थिति से बिहार निर्यात क्षेत्र पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे छोटे और बड़े दोनों तरह के कारोबारी प्रभावित हो रहे हैं।

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निर्यातकों की प्रमुख चिंताएँ और समाधान की उम्मीद

निर्यातकों ने बताया कि बिहार का मखाना उद्योग वैश्विक बाजारों में लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा था, लेकिन बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत ने विदेशी खरीदारों से नए ऑर्डर की गति को धीमा कर दिया है। इसका असर भागलपुर सिल्क, मधुबनी पेंटिंग और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों के बिहार निर्यात पर भी पड़ रहा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह व्यवधान लंबा खिंचता है, तो निर्यात आदेशों में और गिरावट आ सकती है और भुगतान में भी देरी हो सकती है। एसोचैम (द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) के बिहार अध्यक्ष विवेक साह ने कहा कि वैश्विक तनाव पहले ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव डाल रहा था, और शिपिंग मार्गों में व्यवधान ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। व्यापार निकायों ने सरकार से निर्यातकों को बढ़ती परिचालन लागतों का प्रबंधन करने में मदद करने के लिए लॉजिस्टिकल सहायता और समर्थन प्रदान करने का आग्रह किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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