
बोकारो मर्डर: झारखंड के बोकारो से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक 18 वर्षीय युवती की हत्या के बाद पुलिस की बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। नौ महीने तक लापता रही पुष्पा महतो का कंकाल मिलने के बाद उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन इस केस में 28 पुलिसकर्मियों का निलंबन कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मामला क्या है?
यह मामला बोकारो की 18 वर्षीय पुष्पा महतो से जुड़ा है, जो 24 जुलाई 2025 को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। उसके परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अगले नौ महीनों तक पुलिस उसे खोजने में नाकाम रही। परिवार ने इस दौरान स्थानीय पुलिस स्टेशनों के चक्कर काटे, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। पुलिस की इस लापरवाही से तंग आकर पीड़ित परिवार ने आखिरकार झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट के दखल के बाद क्या हुआ?
झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) और संबंधित एसपी (पुलिस अधीक्षक) को तलब किया। हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। अदालती निर्देश के महज 24 घंटे के भीतर पुलिस ने इस बोकारो मर्डर केस का खुलासा कर दिया। जांच में सामने आया कि पुष्पा का बॉयफ्रेंड दिनेश महतो ही उसकी हत्या का दोषी है। पुलिस के अनुसार, दिनेश ने पुष्पा पर शादी का दबाव बनाने के कारण उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने जांच के बाद पुष्पा का कंकाल भी बरामद कर लिया है, जिससे इस जघन्य अपराध की पुष्टि हुई। दिनेश महतो को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
SIT पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
इस पूरे बोकारो मर्डर मामले में कुल 28 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है, जो अपने आप में एक बड़ा कदम है। पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। प्रेस नोट के अनुसार, इस केस की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ही आरोपी दिनेश महतो के साथ मिली हुई थी। आरोप है कि SIT के सदस्यों ने न केवल आरोपी से पैसे लिए, बल्कि उसके साथ पार्टियां भी कीं, जिससे जांच की निष्पक्षता पूरी तरह से प्रभावित हुई। यह पूरी घटना पुलिस लापरवाही का एक जीता-जागता उदाहरण है, जिसने न्याय की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पुलिस की यह कार्यप्रणाली दर्शाता है कि कैसे कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से एक गंभीर अपराध की जांच में बाधा डाली गई और न्याय मिलने में देरी हुई।







