



दिल्ली, देशज टाइम्स। आज वो शख्स अपना 63वां जन्मदिन मना रहा है, जिसने छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा। कभी गंभीर किरदार, तो कभी कॉमेडी में हंसा-हंसाकर लोटपोट करने वाले शेखर सुमन का नाम आज भी लोगों की ज़ुबान पर है। लेकिन क्या आप जानते हैं, उनके जीवन की ये फिल्मी कहानी कितनी उतार-चढ़ाव भरी रही है, और हाल ही में उन्होंने सियासत में भी नया दांव चला है?
7 दिसंबर को 63 साल के हुए शेखर सुमन भारतीय सिनेमा के एक बहुमुखी प्रतिभा वाले कलाकार हैं। वह सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक सफल एंकर, निर्माता, निर्देशक और गायक भी हैं। मूल रूप से बिहार के पटना से ताल्लुक रखने वाले शेखर सुमन एक अंबस्थ कायस्थ परिवार से आते हैं, जिन्होंने अपनी कला से हिंदी मनोरंजन उद्योग में एक खास मुकाम बनाया है।
रुपहले पर्दे पर ‘उत्सव’ से शुरुआत
शेखर सुमन ने अपने चमकदार करियर की शुरुआत साल 1985 में फिल्म “उत्सव” से की थी। इस फिल्म का निर्माण शशि कपूर ने किया था और इसका निर्देशन गिरीश कर्नाड ने किया था। फिल्म में उन्होंने दिग्गज अभिनेत्री रेखा के साथ अभिनय किया। इसके बाद उन्होंने करीब 35 फिल्मों में अपनी अदाकारी का जौहर दिखाया, जिनमें ‘मानव हत्या’, ‘नाचे मयूरी’, ‘संसार’, ‘अनुभव’, ‘त्रिनिदेव’, ‘पति परमेश्वर’ और ‘रणभूमि’ जैसी फिल्में प्रमुख हैं।
टेलीविजन की दुनिया के बेताज बादशाह
शेखर सुमन का टेलीविजन करियर भी उतना ही शानदार रहा है। उन्होंने 1984 में ‘वाह जनाब’ नामक धारावाहिक से टीवी पर कदम रखा, जिसमें उनके साथ किरण जुनेजा थीं। इसके बाद वे ‘देख भाई देख’, ‘रिपोर्टर’, ‘कभी इधर कभी उधर’, ‘छोटे बाबू’, ‘अंदाज़’ और ‘अमर प्रेम’ जैसे कई लोकप्रिय शोज का हिस्सा बने। ‘विलायती बाबू’ और ‘मूवर्स एन शेकर्स’ जैसे शो ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। उन्होंने ‘सिंपली शेखर’ और ‘कैरी ऑन शेखर’ जैसे अपने खुद के शो भी होस्ट किए।
वह स्टार वन पर ‘फिल्म दीवाने’ और ‘द ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो’ के मेजबान भी रहे। इसके अतिरिक्त, सहारा टीवी पर ‘डायल वन और जीतो’, ज़ी टीवी पर ‘नीलाम घर’, स्टार वन पर ‘ही-मैन’ और स्टार न्यूज़ पर ‘पोल खोल’ जैसे क्विज़ शो को भी उन्होंने बड़ी कुशलता से होस्ट किया। साल 2015 में, उन्होंने ‘आज तक’ पर ‘अबकी बारी शेखर बिहारी’ नाम के कार्यक्रम की मेजबानी भी की।
कॉमेडी मंच से लेकर जज की कुर्सी तक
शेखर सुमन ने कई कॉमेडी शोज में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वे नवजोत सिंह सिद्धू के साथ ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ के शुरुआती जजों में से एक थे। हालांकि, सह-मेजबान के साथ मतभेदों के चलते उन्होंने तीन सीज़न के बाद शो छोड़ दिया था। इसके बावजूद, वे ‘कॉमेडी सर्कस’ (सोनी टीवी) और ‘कॉमेडी सुपरस्टार’ (सब टीवी) जैसे कई अन्य कॉमेडी शो में जज के रूप में दिखाई दिए। उन्होंने सब टीवी पर ‘जब खेलो सब खेलो’ शो की मेजबानी भी की और सोनी टीवी पर प्रसारित हुए लोकप्रिय डांस रियलिटी शो ‘झलक दिखला जा’ के चौथे सीज़न में एक प्रतियोगी के तौर पर हिस्सा लिया।
संगीत, निर्देशन और रियलिटी का अनोखा सफर
अभिनय और एंकरिंग के अलावा, शेखर सुमन ने गायकी और निर्देशन में भी हाथ आजमाया है। उन्होंने “कुछ ख्वाब ऐसे” नामक एक म्यूजिक एल्बम से गायन की दुनिया में कदम रखा। यह आठ प्रेम गीतों का एक संग्रह था, जिसके संगीतकार आदेश श्रीवास्तव थे और गीत श्याम राज ने लिखे थे। दिसंबर 2009 में, वह पिछले जन्म पर आधारित रियलिटी टीवी सीरीज़ ‘राज़ पिछले जन्म का’ में एक प्रतिभागी के रूप में दिखाई दिए, जिसने काफी सुर्खियां बटोरीं। साल 2014 में, उन्होंने फिल्म ‘हार्टलेस’ के साथ निर्देशन में डेब्यू किया, जिससे उन्होंने अपनी रचनात्मक क्षमताओं का एक और पहलू दुनिया को दिखाया।
निजी जीवन की कसौटियां और सियासत का दामन
शेखर सुमन का निजी जीवन भी कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। उन्होंने 4 मई 1983 को अलका सुमन से शादी की। उनके छोटे बेटे अध्ययन सुमन भी बॉलीवुड में एक अभिनेता के तौर पर सक्रिय हैं। हालांकि, उनके बड़े बेटे आयुष का 11 साल की छोटी उम्र में 3 अप्रैल 1995 को दिल की बीमारी के कारण निधन हो गया था, जो उनके परिवार के लिए एक बड़ा आघात था।
कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद शेखर सुमन ने राजनीति की दुनिया में भी कदम रखा। मई 2009 में, उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पटना साहिब लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें भारतीय जनता पार्टी के शत्रुघ्न सिन्हा से हार का सामना करना पड़ा और वे तीसरे स्थान पर रहे। हाल ही में, 5 मई 2024 को, शेखर सुमन ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
हालिया परियोजनाएं और भविष्य की संभावनाएं
हाल के दिनों में शेखर सुमन संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज़ ‘हीरामंडी’ में अपनी भूमिका को लेकर चर्चा में रहे हैं। हालांकि, यह महत्वाकांक्षी परियोजना उम्मीद के मुताबिक बहुत सफल नहीं रही। इसके बावजूद, शेखर सुमन का जलवा आज भी कायम है। सिनेमा, टेलीविजन और राजनीति के इस संगम में उनकी यात्रा यह बताती है कि एक कलाकार अपनी सीमाओं से परे जाकर कितने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ सकता है। उनके आगामी प्रोजेक्ट्स पर प्रशंसकों की निगाहें टिकी हुई हैं, यह देखने के लिए कि बिहार का यह लाडला आगे और क्या कमाल दिखाता है।





