
बिहार के छपरा में शराबकांड ने सरकार की नींद उड़ा दी है। विपक्ष के दबाव और लोगों की मौत के बीच अब पुलिस मुख्यालय का बड़ा फैसला सामने आया है। भले मुआवजा ना देने को लेकर सरकार के निर्णय पर फैसला सुप्रीम कोर्ट में नौ जनवरी को होना है जहां जनहित याचिका दायर की गई है। इसके साथ ही मामले की छानबीन अब सीआईडी भी करेगी।
राज्य स्तर पर मद्य निषेध विभाग अपराध अनुसंधान विभाग की मद्य निषेध विभाग की टीम इसकी जांच करेगी। इस पूरे मामले को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा ने 20 दिनों के बाद इस मामले को सीआईडी को सौंपने पर सवाल उठाया है।
सत्तापक्ष से जुड़े नेताओं का कहना है कि सीआईडी जांच के बाद निष्पक्ष रिपोर्ट सामने आएगी और सरकार की मंशा किसी को बचाने या फंसाने की नहीं है। जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा है कि हमें जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए और जांच रिपोर्ट आ जाएगी तो बेवजह आरोप लगाने की प्रवृत्ति भी खत्म होगी।
जानकारी के अनुसार, जहरीली शराबकांड की जांच अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के साथ ही मामला और गरमा गया है। इसके साथ ही मामले की जांच के लिए अब सीआईडी भी आ गई हेै। इसको लेकर पुलिस मुख्यालय ने एक आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक सारण जहरीली शराबकांड में सीआईडी आगे की जांच करेगी।
आदेश में यह भी कहा गया है कि छपरा के मशरख और इसुआपुर थाने में दर्ज केस की जांच अब सीआईडी के तहत मद्य निषेध इकाई करेगी। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचक दायर की गई है जिसकी सुनवाई नौ जनवरी को होगी। इस याचिका में जहरीली शराब से हुए मौत को लेकर पीड़ित परिवार को मुआवजे की बात कही गई है, इसके साथ ही जांच के लिए एसआईटी की जांच का भी जिक्र है।







