
Airport Security: जैसे स्मार्टफोन ने कैमरे और घड़ी की जगह ले ली, वैसे ही अब देश के हवाई अड्डों पर तकनीक सुरक्षा जवानों की भूमिका को सीमित करने जा रही है। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) की एक क्रांतिकारी सिफारिश के बाद देश के 70 हवाई अड्डों के सुरक्षा ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसके तहत हजारों जवानों को हटाया जाएगा। यह प्रस्ताव दिल्ली और मुंबई जैसे देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों पर भी लागू होगा।
Airport Security को लेकर क्यों लिया गया यह फैसला?
नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) द्वारा हाल ही में किए गए एक विस्तृत सुरक्षा ऑडिट के बाद यह सिफारिश सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, हवाई अड्डों पर अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सुरक्षा कर्मियों की जरूरत को कम किया जा सकता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि हवाई अड्डों पर तैनात कुल 50,000 सीआईएसएफ जवानों में से लगभग 12,000 को गैर-प्रमुख सुरक्षा जिम्मेदारियों से मुक्त किया जा सकता है। इन जिम्मेदारियों में कतार प्रबंधन, निगरानी और कुछ प्रवेश द्वारों पर तैनाती जैसे कार्य शामिल हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण नई तकनीक का आगमन है। पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय हवाई अड्डों पर कई आधुनिक सुरक्षा प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
- फुल-बॉडी स्कैनर
- एडवांस एक्स-रे मशीनें
- बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली ‘डिजी यात्रा’
- ऑटोमेटेड ई-गेट्स
इन तकनीकों ने मैनुअल चेकिंग की आवश्यकता को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे यात्रियों का समय बचता है और सुरक्षा प्रक्रिया अधिक कुशल बनती है। अधिकारियों का मानना है कि इन गैर-प्रमुख कार्यों से जवानों को हटाकर उन्हें अधिक महत्वपूर्ण और रणनीतिक सुरक्षा भूमिकाओं में लगाया जा सकता है।
क्या तकनीक जवानों का विकल्प बन सकती है?
इस प्रस्ताव का एक बड़ा वित्तीय पहलू भी है। सीआईएसएफ जवानों की तैनाती का खर्च संबंधित एयरपोर्ट ऑपरेटर उठाते हैं। जवानों की संख्या कम होने से एयरपोर्ट संचालकों पर वित्तीय बोझ कम होगा, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को ‘पैसेंजर सर्विस फीस’ में कमी के रूप में मिल सकता है। यह कदम वैश्विक मानकों के अनुरूप है, जहां उन्नत देश नागरिक उड्डयन सुरक्षा के लिए तकनीक और निजी सुरक्षा का मिला-जुला मॉडल अपनाते हैं। भारत में हवाई अड्डों की बढ़ती संख्या और ट्रैफिक के कारण सीआईएसएफ पर भी दबाव बढ़ रहा था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
हालांकि, इस प्रस्ताव पर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। उनका मानना है कि मौजूदा वैश्विक सुरक्षा माहौल, विशेषकर आतंकवाद और पड़ोसी देशों से तनाव को देखते हुए, इतनी बड़ी संख्या में प्रशिक्षित जवानों को हटाना जोखिम भरा हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वरिष्ठ अधिकारियों का मत है कि तकनीक केवल मानवीय बुद्धिमत्ता की सहायक हो सकती है, उसका पूर्ण विकल्प नहीं। इसलिए, यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से और पूरी सावधानी के साथ लागू की जानी चाहिए ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।
हटाए गए जवानों का क्या होगा?
गृह मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं। यदि यह योजना लागू होती है, तो यह भारतीय विमानन सुरक्षा के इतिहास में सबसे बड़ा मैनपावर पुनर्गठन होगा। योजना के अनुसार, हवाई अड्डों से हटाए गए 12,000 जवानों को बेकार नहीं छोड़ा जाएगा। उन्हें देश के अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर तैनात किया जाएगा, जहां सुरक्षा बलों की सख्त आवश्यकता है। इनमें परमाणु केंद्र, मेट्रो रेल नेटवर्क और नए बन रहे हवाई अड्डे शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य सीआईएसएफ के प्रशिक्षित संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करना है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि हवाई अड्डों की सुरक्षा का स्तर कमजोर न पड़े और यात्रियों का विश्वास बना रहे।




