

Congress Protest: धर्म की मर्यादा पर जब कानूनी तलवारें लटकें, तब विरोध की मशालें जल उठती हैं। उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसा ही हुआ, जहां कांग्रेस ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में मोर्चा खोल दिया।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन: शंकराचार्य के खिलाफ FIR पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने की निष्पक्ष जांच की मांग
शंकराचार्य के समर्थन में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन: न्याय की मांग
Congress Protest: धर्म की मर्यादा पर जब कानूनी तलवारें लटकें, तब विरोध की मशालें जल उठती हैं। उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसा ही हुआ, जहां कांग्रेस ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में मोर्चा खोल दिया। बुधवार को प्रदेश कांग्रेस इकाई ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वालों के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग को लेकर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक ज्ञापन भी 25 फरवरी को राज्य के सभी जिलों में जिलाधिकारियों के माध्यम से सौंपा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एक प्रवक्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में जिला प्रशासन के माध्यम से ये ज्ञापन सौंपे गए।
कांग्रेस पार्टी ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि अमावस्या के अवसर पर पुलिस ने शंकराचार्य और उनके शिष्यों को ‘अनावश्यक रूप से परेशान और अपमानित’ किया। उन्हें अनुष्ठान स्नान करने से रोका गया, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता का हनन हुआ। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया कि कुछ शिष्यों के साथ मारपीट की गई और उन्हें पुलिस थाने भी ले जाया गया। पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में शंकराचार्य, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और कई अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई। कांग्रेस ने इस प्राथमिकी को अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से रची गई एक गहरी साजिश करार दिया। पार्टी का कहना है कि इस एफआईआर जांच में कोई भी पक्षपात नहीं होना चाहिए और पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
संवैधानिक अधिकारों का हनन और साजिश का आरोप
संविधान के अनुच्छेद-25 और 26 का हवाला देते हुए ज्ञापन में कहा गया कि ये प्रावधान धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संप्रदायों को अपने मामलों का प्रबंधन करने के अधिकार की गारंटी देते हैं। कांग्रेस ने शंकराचार्य के पद को ‘सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक’ बताते हुए आरोप लगाया कि यह पूरा प्रकरण ‘योजनाबद्ध तरीके से रचा गया’ प्रतीत होता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
कांग्रेस पार्टी ने ज्ञापन में सरकार से मांग की, ‘हम अनुरोध करते हैं कि जिन लोगों ने प्राथमिकी दर्ज कराई है, उनकी पृष्ठभूमि की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा पारदर्शी तरीके से की जाए और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।’ पार्टी ने कहा कि इस तरह के गंभीर आरोप लगाने वालों की पूरी पड़ताल होना बेहद आवश्यक है ताकि सच्चाई उजागर हो सके। यह एफआईआर जांच एक मिसाल बननी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कांग्रेस ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए आरोपों की ‘निष्पक्ष और पारदर्शी जांच’ की भी मांग की ताकि सच्चाई सामने आ सके। इससे पहले, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय ने वाराणसी में संत से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा था कि पार्टी इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ मजबूती से खड़ी है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार पर दबाव बनाना जारी रखेगी।
शंकराचार्य पर लगे आरोप और उनकी प्रतिक्रिया
यह प्रकरण 21 फरवरी को प्रयागराज में तब शुरू हुआ जब अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ पिछले एक साल में एक गुरुकुल और धार्मिक सभाओं में एक नाबालिग सहित दो व्यक्तियों के साथ यौन दुर्व्यवहार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई। मामला दर्ज होने के कुछ दिनों बाद, सरस्वती ने सोमवार को कहा था कि वह अपनी गिरफ्तारी का विरोध नहीं करेंगे और जोर देकर कहा था कि ‘मनगढ़ंत कहानी’ का पर्दाफाश देर-सवेर हो ही जाएगा। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे गहरी साजिश का हिस्सा बताया।

