



Parliament Protest: लोकतंत्र के मंदिर में गूंजती आवाज़ें और आरोपों का बवंडर, क्या संसदीय मर्यादाओं का हो रहा है उल्लंघन?
संसद में महिला सांसदों के ‘गंभीर आरोप’ और Parliament Protest की गरमाई सियासत
महिला सांसदों के गंभीर आरोप: Parliament Protest की नई दिशा
Parliament Protest: सोमवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक तीखा पत्र सौंपा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल ने उन्हें ‘झूठे, निराधार और मानहानिकारक’ दावे करने के लिए मजबूर किया है। इस आरोप के जवाब में अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद सदन में प्रधानमंत्री की सीट के पास आकर एक अभूतपूर्व घटना को अंजाम दे सकती हैं, जिससे अप्रिय स्थिति पैदा हो सकती है।
महिला सांसदों का कहना है कि सदन में उनका विरोध पूरी तरह से शांतिपूर्ण था और संसदीय मानदंडों के अनुरूप था। इसके बावजूद उन्हें अभूतपूर्व तरीके से निशाना बनाया गया। उन्होंने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लगातार चार दिनों तक अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। वहीं, दूसरी ओर एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में ‘अश्लील और अभद्र’ टिप्पणियाँ करने की खुली छूट दी गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
स्पीकर की भूमिका पर उठे सवाल
सांसदों ने यह भी दावा किया कि जब वे भाजपा सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर स्पीकर से मिले, तो उन्होंने (स्पीकर) अपनी गलती स्वीकार की। हालांकि, बाद में उन्होंने संकेत दिया कि वे सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। इससे यह बात स्पष्ट हो गई कि ऐसे संवेदनशील मामलों में स्पीकर अब स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पा रहे हैं। अगले ही दिन, सांसदों ने आरोप लगाया कि स्पीकर ने कथित तौर पर सत्तारूढ़ दल के दबाव में आकर प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को सही ठहराने के लिए एक बयान जारी किया और उनके खिलाफ ‘गंभीर आरोप’ लगाए। यह स्थिति लोकसभा की कार्यवाही में एक नई बहस को जन्म दे रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
महिला सांसदों ने एक बार फिर जोर देकर कहा कि उनका विरोध लगातार शांतिपूर्ण, दृढ़ और पूरी तरह से लोकतांत्रिक मानदंडों के अनुसार था। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि उनमें से कई साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं और पहली पीढ़ी की राजनेता हैं। इन सांसदों ने प्रतिरोध और भेदभाव के बावजूद दशकों की सार्वजनिक सेवा के माध्यम से अपना करियर बनाया है। सांसदों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को लगातार जवाबदेह ठहराने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री का सदन से अनुपस्थित रहना उनकी ओर से किसी खतरे का जवाब नहीं, बल्कि एक ‘डर का कार्य’ था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



