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बड़ी ख़बर – मोदी सरकार ₹642 में दे रही LPG, लेकिन ग्राहकों के लिए आ गया बड़ा अपडेट

राजधानी में रसोई गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बीच प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को एक बड़ा झटका लगा है। सरकार ने सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की वार्षिक सीमा को घटाकर चार कर दिया है, जिससे लाखों परिवारों की रसोई का बजट प्रभावित होगा।

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Delhi LPG News: राजधानी दिल्ली में रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। 7 जून को प्रति सिलेंडर 29 रुपये की वृद्धि के बाद अब 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये तक पहुंच गई है। हालांकि, लाखों प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अब भी सब्सिडी के साथ सिलेंडर 642 रुपये में मिल रहा है, लेकिन उनके लिए एक बड़ा बदलाव आया है।

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यह वृद्धि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण हुई वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का परिणाम है, जिसके बाद घरेलू रसोई गैस के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को भी एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये का इजाफा किया गया था, जो लगातार दूसरी बढ़ोतरी है। आम जनता इस मूल्य वृद्धि से चिंतित है।

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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर दिए जाते हैं ताकि वे लकड़ी या कोयले के धुएं से होने वाली बीमारियों से बच सकें। देशभर में यह Ujjwala Yojana News लाखों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई थी और अब तक करोड़ों घरों तक पहुंची है।

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उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए वार्षिक सीमा में कटौती का बड़ा फैसला

सरकार ने मई 2022 में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए प्रति सिलेंडर 200 रुपये की लक्षित सब्सिडी शुरू की थी। बाद में अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया था, जो सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाती है। इसी कारण दिल्ली में उज्ज्वला लाभार्थियों को गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर की तुलना में 642 रुपये में सिलेंडर मिलता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

इस बीच, मोदी सरकार ने सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की वार्षिक सीमा को कम करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिससे लाखों परिवारों को प्रभावित होना तय है। पहले उज्ज्वला लाभार्थियों को एक वर्ष में 14.2 किलोग्राम के 12 सिलेंडर सब्सिडी पर मिलते थे।

वर्ष 2016 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, पिछले साल सब्सिडी वाले सिलेंडर की संख्या घटाकर नौ कर दी गई थी। अब इसे और भी कम करके सिर्फ चार सिलेंडर प्रति वर्ष कर दिया गया है। यह फैसला लाभार्थियों की औसत वार्षिक गैस खपत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

तेल कंपनियों का भारी घाटा और कीमतों पर इसका असर

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संशोधित सीमा उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत वार्षिक गैस खपत के लगभग बराबर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप ही समर्थन प्रदान करना है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

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खनूजा ने यह भी बताया कि वर्तमान में पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी की बिक्री पर प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये का भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की बिक्री में भी लागत से कम कीमत पर बिक्री के कारण कंपनियों को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है।

इन संयुक्त घाटों के कारण, कुल मिलाकर पेट्रोलियम कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 600-700 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि इसी वित्तीय दबाव के कारण तेल एवं गैस के दाम बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ता है, ताकि कंपनियों की आर्थिक स्थिति को स्थिर रखा जा सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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आम और खास उपभोक्ताओं पर दोहरी मार

एलपीजी कीमतों में वृद्धि और सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में कटौती, दोनों ही फैसले उपभोक्ताओं पर दोहरी मार डाल रहे हैं। जहां एक ओर सामान्य उपभोक्ता बिना सब्सिडी के बढ़े हुए दाम चुकाने को मजबूर हैं, वहीं उज्ज्वला लाभार्थी अब कम संख्या में ही सब्सिडी का लाभ उठा पाएंगे। इससे परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम वित्तीय स्थिरता और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। हालांकि, इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ और बढ़ेगा, जिन्हें अपनी दैनिक जरूरतों के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस योजना को और कैसे समायोजित करती है और क्या उपभोक्ताओं को बढ़ती महंगाई से राहत दिलाने के लिए कोई अन्य उपाय किए जाते हैं। एलपीजी की बढ़ती कीमतें और सब्सिडी में कमी एक गंभीर मुद्दा बनी हुई है, जिस पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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