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Deshaj Times Special Story| Political Rivalry Of Hindu Symbolism | हिंदू प्रतीकवाद की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता

रामचरितमानस में तो राम ने कहा भी है-शिवद्रोही मम दास कहावा, सो नर सपनेहु मोहि न भावा। यह एक तरह से उग्र हिंदुत्व की नीति पर प्रहार है। हिंदू समाज में तो पीपल के पेड़ के नीचे रखे पत्थर को भी शिव का रूप मानकर पूजने, जल चढ़ाने की परंपरा है।शिव की बारात तो एक मुहावरा ही बन गया है- यानी तमाम ऐसे लोगों की मंडली जो समाज की मुख्यधारा से बाहर हैं- वंचित, दलित, गरीब, पिछड़े, अशिक्षित, आदिवासी। 12 ज्योतिर्लिंगों के अलावा भी उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक शायद सबसे ज्यादा मंदिर शिव के ही होंगे।महंगाई से लेकर नीट परीक्षा और अग्निवीर जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की मुहिम के साथ-साथ शिव की अभय मुद्रा के बहाने नर्म और समावेशी हिंदुत्व की छवि और नीति से फायदा.... एक विश्लेषण: Amitaabh Srivastava, Senior Journalist, Delhi

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Amitaabh Srivastava| Senior Journalist, Delhi| Deshaj Times Special Story| हिंदू प्रतीकवाद की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विताजो राम को लाने का दावा करते थे, उन्हें शिव की तस्वीर दिखाने पर एतराज क्यों करना चाहिए? शिव तो हिंदुओं के भगवान, अवधेश कहे जाने वाले राम के भी आराध्य हैं। रामचरितमानस में तो राम ने कहा भी है-शिवद्रोही मम दास कहावा, सो नर सपनेहु मोहि न भावा। यूं भी, शिव तो हिंदुओं के (Deshaj Times Special Story, Political rivalry of Hindu symbolism) प्रमुख आराध्य देव हैं, बल्कि देवों के देव ‘महादेव’ कहलाते हैं!

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Deshaj Times Special Story| Political Rivalry Of Hindu Symbolism| जिस दिन राहुल गांधी ने लोकसभा में शिव की तस्वीर दिखाई, आषाढ़ का सोमवार था

क्या दिलचस्प संयोग है कि जिस दिन राहुल गांधी ने लोकसभा में शिव की तस्वीर दिखाई, आषाढ़ का सोमवार था। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सोमवार शिव का ही दिन है। अगर राहुल गांधी शिव की तस्वीर लहराने के पीछे इतनी दूर की सोचकर आये थे तो फिर उन्हें एक्स्ट्रा दाद देनी पड़ेगी क्योंकि हिंदू प्रतीकवाद की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में यह बीजेपी की कसमसाहट बढ़ा सकता है।

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Deshaj Times Special Story| Political Rivalry Of Hindu Symbolism| शिव तो लीक से हटकर चलने वाले देवता के रूप में जाने जाते हैं

वैसे भी, शिव तो लीक से हटकर चलने वाले देवता के रूप में जाने जाते हैं। समाज से बहिष्कृत बिरादरी को अपने इर्द-गिर्द जुटाए रखने वाले, भांग, धतूरा का सेवन करने वाले, एक लोटा जल से प्रसन्न हो जाने वाले देवता। शिव की बारात तो एक मुहावरा ही बन गया है- यानी तमाम ऐसे लोगों की मंडली जो समाज की मुख्यधारा से बाहर हैं- वंचित, दलित, गरीब, पिछड़े, अशिक्षित, आदिवासी।

Deshaj Times Special Story| Political Rivalry Of Hindu Symbolism| सिर्फ काशी विश्वनाथ और सोमनाथ जैसे भव्य मंदिर नहीं, बल्कि

12 ज्योतिर्लिंगों के अलावा भी उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक शायद सबसे ज्यादा मंदिर शिव के ही होंगे। सिर्फ काशी विश्वनाथ और सोमनाथ जैसे भव्य मंदिर नहीं, बल्कि गांव कस्बों की गलियों में तमाम छोटे-छोटे मंदिर भी। हिंदू समाज में तो पीपल के पेड़ के नीचे रखे पत्थर को भी शिव का रूप मानकर पूजने, जल चढ़ाने की परंपरा है।

Deshaj Times Special Story| Political Rivalry Of Hindu Symbolism| मानसरोवर यात्रा कर चुके और खुद को शिवभक्त घोषित कर चुके

मानसरोवर यात्रा कर चुके और खुद को शिवभक्त घोषित कर चुके राहुल गांधी प्रतीकों के माध्यम से इशारों-इशारों में गहरी चाल चल गये हैं। राहुल गांधी को पप्पू साबित करने का बीजेपी का प्रॉजेक्ट तो पहले ही बुरी तरह फेल हो चुका है। अब अधिक आक्रामक और आत्मविश्वास से भरे राहुल गांधी को हिंदू विरोधी साबित करके उनके खिलाफ जनमत बनाने की कोशिशें इस बार बीजेपी के लिए मुश्किल होंगी। राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी तो कहा कि बीजेपी हिंदुओं की ठेकेदार न बने।

Deshaj Times Special Story| Political Rivalry Of Hindu Symbolism| महंगाई से लेकर नीट परीक्षा और अग्निवीर जैसे मुद्दों पर

यानी हिंदू वोट पर अकेले अपना कब्जा न समझे। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि आप यानी बीजेपी हिंदू हो ही नहीं। यह एक तरह से उग्र हिंदुत्व की नीति पर प्रहार है। यह दांव सोच समझकर खेला गया लगता है। महंगाई से लेकर नीट परीक्षा और अग्निवीर जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की मुहिम के साथ-साथ शिव की अभय मुद्रा के बहाने नर्म और समावेशी हिंदुत्व की छवि और नीति से फायदा मिले तो बुरा क्या है! (यह लेखक के अपने विचार हैं)

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