

Digvijaya Singh: राजनीति का अखाड़ा, जहां हर खिलाड़ी अपनी चाल चलता है, वहां कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो अपने अंदाज़ से छाप छोड़ जाते हैं। ऐसे ही एक अनुभवी और लोकप्रिय नेता हैं दिग्विजय सिंह, जो आज अपना 79वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपनी मिलनसार प्रकृति और राजनीतिक दूरदर्शिता के लिए प्रसिद्ध दिग्विजय सिंह ने साल 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके विरोधी भी उनकी विनम्रता के कायल रहे हैं, फिर भी वे अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए कभी झुकते नहीं हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आइए, उनके जन्मदिन के इस विशेष अवसर पर, उनके जीवन और राजनीतिक यात्रा से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों पर गौर करते हैं।
दिग्विजय सिंह: विनम्रता और दृढ़ता का संगम
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 28 फरवरी 1947 को जन्मे दिग्विजय सिंह का संबंध राघौगढ़ रियासत के शाही परिवार से है। राजनीति उन्हें विरासत में मिली थी, क्योंकि उनके पिता, बलभद्र सिंह, स्वयं एक अनुभवी विधायक थे। इस पृष्ठभूमि ने उन्हें कम उम्र से ही सार्वजनिक जीवन को समझने और उसमें शामिल होने का अवसर प्रदान किया।
दिग्विजय सिंह का राजनीतिक करियर साल 1969 में तब शुरू हुआ जब उन्होंने, महज़ 22 साल की उम्र में, राघौगढ़ नगर पालिका का चुनाव सफलतापूर्वक जीता। इस जीत के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने 54 साल के लंबे और उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक सफर में, उन्होंने राघौगढ़ की स्थानीय राजनीति से लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति और दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति तक एक प्रभावशाली यात्रा तय की है।
मुख्यमंत्री के रूप में महत्त्वपूर्ण कार्यकाल
दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकालों तक सेवा की, जो 1993 से 2003 तक रहा। इस अवधि में, उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहल कीं जिनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और गरीबों का सशक्तिकरण करना था। उनकी सरकार ने शिक्षा गारंटी योजना के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके साथ ही, उन्होंने एक सहभागितापूर्ण जलग्रहण विकास कार्यक्रम, रोग कल्याण समिति और जिला गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्वास्थ्य वितरण प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया। जन स्वास्थ्य रक्षक-अग्रिम सरकारी प्रणाली भी इस दौरान लागू की गई, जिससे आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। स्वास्थ्य सेवाओं को दूरदराज के इलाकों तक पहुँचाया जा सका। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
दिग्विजय सिंह को महाराष्ट्र की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण हस्ती के रूप में देखा जाता है, और वे अक्सर देश और मध्य प्रदेश की राजनीति में सुर्खियों में रहते हैं। उनका उपनाम ‘दिग्गी राजा’ भी एक रोचक कहानी से जुड़ा है। यह घटना साल 1984 की है जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश भर से युवा कांग्रेसियों को अपने कोर ग्रुप में शामिल किया था। उस समय दिग्विजय सिंह एक लोकसभा सांसद थे और दिल्ली में एक डिनर पार्टी में हिस्सा ले रहे थे, जिसमें कई बड़े कांग्रेसी नेता और पत्रकार मौजूद थे। इस अवसर पर, एक अखबार के संपादक को दिग्विजय सिंह का नाम उच्चारण करने में कठिनाई हो रही थी, जिसके कारण उन्होंने उन्हें ‘दिग्गी राजा’ कहकर संबोधित करना शुरू कर दिया, क्योंकि यह नाम छोटा और याद रखने में आसान था। यह नाम तब से उनके साथ जुड़ा हुआ है और आज भी वे इसी नाम से पहचाने जाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



