
दरभंगा समेत संपूर्ण मिथिला और खासकर सिंहवाड़ा आज गौरवान्वित महसूस कर रहा है। दरभंगा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व इतिहास विभागाध्यक्ष और लनामिवि के प्रथम वीसी मदनेश्वर मिश्र के योग्य पुत्र प्रखर इतिहासविद् डॉ.रत्नेश्वर मिश्र को साहित्य अकाडमी पुरस्कार से नवाजा गया है।
अकादमी ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि रैणा को कश्मीरी में लिखी पुस्तक का हिंदी में ‘कश्मीरी की प्रतिनिधि कहानियां’ नाम से अनुवाद करने के लिए अनुवाद पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान किया गया है। वहीं, रत्नेश्वर मिश्र को अंग्रेजी में लिखे उपन्यास का मैथिली में ‘आज़ादी’ नाम से अनुवाद करने के लिए साहित्य अकाडमी सम्मान मिला है।
जानकारी के अनुसार, साहित्य अकादमी ने हिंदी, मैथिली और कोंकणी भाषाओं में साल 2022 के ‘अनुवाद पुरस्कार’ की बृहस्पतिवार को घोषणा की। हिंदी में गौरीशंकर रैणा को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले पिछले हफ्ते अकादमी ने 17 भाषाओं के लेखक-लेखिकाओं को अनुवाद पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की थी और हिंदी समेत कुछ भाषाओं में तकनीकी कारणों से अनुवाद पुरस्कारों की घोषणा नहीं की गई थी
और माणिकराव राम नाइक गावणेकार को बंगाली पुस्तक का कोंकणी में ‘श्रीरामकृष्ण अमृतवाणी’ नाम से तर्जुमा करने के लिए साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा। अकादमी हर साल 24 भारतीय भाषाओं के लेखक-लेखिकाओं को अनुवाद पुरस्कार से सम्मानित करती है।
उसने पिछले बृहस्पतिवार को 17 भाषाओं के लिए पुरस्कारों की घोषणा की थी। इसके बाद अकादमी ने गत शनिवार को ओडिया भाषा में अनुवाद पुरस्कार देने का ऐलान किया था। बयान के मुताबिक, कमला सत्पथी को तेलुगु उपन्यास का ओडिया में ‘सुनेली बादल’ नाम से अनुवाद करने के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। बयान के मुताबिक, पुरस्कार के रूप में एक उत्कीर्ण ताम्रफलक और 50 हज़ार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। डॉ.रत्नेश्वर मिश्र की इस विशिष्ठ उपलब्धि से सिंहवाड़ा भी गदगद है। सिंहवाड़ा डॉ.मिश्र का ससुराल है।







