सत्ता और जांच एजेंसी की जंग जब हद पार करती है, तो मामला दिल्ली की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंचता है। पश्चिम बंगाल में कुछ ऐसा ही हुआ है, जहां ममता सरकार और प्रवर्तन निदेशालय आमने-सामने हैं। ED-Bengal Clash: प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC पर हुई छापेमारी के मामले में ED ने आज सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की है। इस याचिका में बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार को तुरंत निलंबित करने की माँग की गई है।
ED-Bengal Clash: क्या है पूरे मामले की पृष्ठभूमि?
यह विवाद 8 जनवरी को कोलकाता में हुई छापेमारी से जुड़ा है। ED की टीम ने I-PAC के निदेशक प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर तलाशी ली थी। ED का आरोप है कि इस तलाशी अभियान के दौरान डीजीपी राजीव कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने एजेंसी के काम में बाधा डाली और जांच प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एजेंसी ने दावा किया कि 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर तलाशी के दौरान कुमार और अन्य टॉप अधिकारियों ने दखल दिया था।
एजेंसी ने अपनी याचिका में राजीव कुमार के बर्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह कोलकाता पुलिस कमिश्नर थे, तब वह ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे। इस व्यवहार को एजेंसी ने निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिकूल बताया है।
सुप्रीम कोर्ट आज ED की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर I-PAC के कोलकाता ऑफिस में तलाशी अभियान में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच सुनवाई करेगी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अलावा, ED ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार, राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा और दक्षिण कोलकाता के डिप्टी कमिश्नर प्रियब्रत रॉय को भी प्रतिवादी बनाया है। यह याचिका पिछले हफ्ते की एक घटना से जुड़ी है, जब ED के अधिकारी कथित कोयला घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत कोलकाता में I-PAC ऑफिस में तलाशी ले रहे थे। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, ममता बनर्जी तलाशी के दौरान वरिष्ठ तृणमूल नेताओं के साथ मौके पर पहुंचीं और ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों से बहस की।
जांच में बाधा और दस्तावेज़ों का हटाना
ED ने आगे आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन के दौरान ऑफिस से कुछ फाइलें हटा दीं, जिससे जांच में गंभीर बाधा आई। अपनी याचिका में, ED ने तर्क दिया है कि तलाशी स्थल पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी से अधिकारियों के लिए डराने वाला माहौल बना और एजेंसी की अपने कानूनी कर्तव्यों को स्वतंत्र रूप से करने की क्षमता से समझौता हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एजेंसी ने जांच के दौरान राज्य प्रशासन से बार-बार बाधा डालने और सहयोग न करने का भी आरोप लगाया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
इस घटना के बाद, पश्चिम बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की, जिससे राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसी के बीच टकराव और बढ़ गया। इन घटनाओं का हवाला देते हुए, ED ने सुप्रीम कोर्ट में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश देने की मांग की है। ED का तर्क है कि राज्य सरकार के कथित दखल को देखते हुए एक निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी की ज़रूरत है।
सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले, ED ने इसी घटना के संबंध में सुरक्षा और उचित निर्देशों के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था। बुधवार को, कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर एक याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ED ने I-PAC ऑफिस या प्रतीक जैन से कोई दस्तावेज़ या सामग्री ज़ब्त नहीं की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह विवाद कोलकाता में I-PAC से जुड़े ठिकानों पर ED की छापेमारी से शुरू हुआ, जिसके बारे में एजेंसी का कहना है कि यह कई करोड़ रुपये के कोयला घोटाला की जांच का हिस्सा है। ED ने आरोप लगाया है कि लगभग 10 करोड़ रुपये की अपराध की रकम हवाला चैनलों के ज़रिए I-PAC को भेजी गई थी, और इस पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म को 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान दी गई सेवाओं के लिए तृणमूल कांग्रेस ने भुगतान किया था।

