गाजियाबाद RJD News: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बेटे इराज लालू यादव का पहला जन्मदिन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में धूमधाम से मनाया गया। यह समारोह लालू प्रसाद यादव की बेटी रागिनी यादव के आवास पर आयोजित किया गया, जिसमें पार्टी और विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं के साथ-साथ पूरा परिवार एकजुट दिखा। इस दौरान सभी की निगाहें दो महत्वपूर्ण शख्सियतों को तलाश रही थीं – तेजप्रताप यादव और रोहिणी आचार्य। सियासी नजरिए से बेहद खास इस जन्मदिन की पार्टी में तेजप्रताप की मौजूदगी और लालू की लाडली रोहिणी आचार्य की गैरमौजूदगी ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।
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रोहिणी आचार्य की गैरमौजूदगी पर गहराया सस्पेंस
इस पार्टी में रोहिणी आचार्य की अनुपस्थिति खास तौर पर सवालों के घेरे में है। रोहिणी वही बेटी हैं जिन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को अपनी किडनी दान कर नया जीवन दिया था। ऐसे में परिवार के एक इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम से उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में “क्या लालू की लाडली ने अपने मायके से फाइनली नाता तोड़ लिया है?” जैसे सवालों को हवा दे दी है। उनकी अनुपस्थिति ने परिवार के भीतर चल रहे गहरे मतभेदों की ओर भी इशारा किया है, जिस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
गाजियाबाद RJD News: सियासी समीकरणों पर चर्चाएं तेज
जन्मदिन समारोह में तेजप्रताप यादव की उपस्थिति ने भी सबका ध्यान खींचा, जबकि रोहिणी की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। दिलचस्प बात यह भी है कि इस आयोजन में तेजस्वी के खास माने जाने वाले संजय यादव भी देखे गए। संजय यादव वही शख्स हैं जिन्हें कुछ समय पहले रोहिणी ने पार्टी की हार का जिम्मेदार ठहराते हुए लालू आवास से हटाने की मांग की थी। संजय यादव की मौजूदगी और रोहिणी की गैरहाजिरी ने राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि RJD के अंदरूनी समीकरण किस करवट बैठ रहे हैं। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर आने वाले समय में बड़े बदलावों का संकेत दे सकता है, जिसका असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ना तय है।
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लालू परिवार में बढ़ते मतभेद और विशेषकर रोहिणी आचार्य की दूरी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में चिंता बढ़ा दी है। इस घटनाक्रम से बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना प्रबल हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि लालू परिवार के भीतर चल रही यह उठापटक क्या मोड़ लेती है और इसका RJD के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।







