
Iranian Warship Sinks: समंदर की लहरें केवल जहाजों को ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को भी डुबो देती हैं। विशाखापत्तनम में भारत की मेजबानी में हुए अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू से लौट रहा ईरानी जंगी जहाज श्रीलंका के पास गहरे समुद्र में समा गया है। जहाज पर सवार 180 नौसैनिकों में से 101 अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिससे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय तनाव की आशंका गहरा गई है।
Iranian Warship Sinks: बचाव कार्य जारी, 78 को बचाया गया
श्रीलंका के तट के पास डूबे ईरानी जहाज पर बचाव और राहत का काम तेजी से चल रहा है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, जहाज पर कुल 180 नाविक सवार थे, जिनमें से 78 को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है। हालांकि, इनमें से 32 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें इलाज के लिए करापितिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 101 लोग अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है। मृतकों की सही संख्या का अभी पता नहीं चल पाया है, क्योंकि खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस घटना ने ऊर्जा शिपिंग मार्गों पर युद्ध के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
विशाखापत्तनम में दिखी थी ताकत
पिछले महीने ही भारत ने विशाखापत्तनम के पूर्वी तट पर एक भव्य अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और ‘मिलन’ नामक बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में 74 देशों की नौसेनाओं ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था। ईरान का फ्रिगेट आईआरआईएस डेना भी इस फ्लीट रिव्यू का हिस्सा था, जो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया और रूस जैसे दर्जनों देशों के युद्धपोतों के साथ खड़ा था। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं इस फ्लीट का निरीक्षण किया था। इस दौरान ईरान के नौसेना कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी के साथ समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर महत्वपूर्ण बातचीत की थी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अमेरिका-इजरायल का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में अमेरिकी नौसेना को अपने गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस पिंकनी को भेजना था, लेकिन अंतिम समय में उसकी भागीदारी रद्द कर दी गई। इसके पीछे एक हैरान करने वाली वजह बताई गई थी। कहा गया कि अगर फ्लीट रिव्यू के दौरान ईरान के साथ युद्ध छिड़ जाता, तो यूएसएस पिंकनी का आईआरआईएस डेना के साथ खड़ा होना शर्मनाक स्थिति पैदा कर सकता था। यह आयोजन 25 फरवरी को समाप्त हुआ और इसके ठीक तीन दिन बाद, 28 फरवरी को, अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ लॉन्च कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच लड़ाई काफी तेज हो गई है और एक-दूसरे पर हवाई हमलों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।






