back to top
⮜ शहर चुनें
मार्च, 16, 2026
spot_img

Delhi Liquor Scam: दिल्ली शराब घोटाला में केजरीवाल और सिसोदिया को कोर्ट से बड़ी राहत, आरोपों से हुए मुक्त

spot_img
- Advertisement -

Delhi Liquor Scam: न्याय की चौखट पर जब सत्य की आवाज गूंजी, तो सारे इल्जाम धूल फांकते नजर आए। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत देते हुए सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने इस बहुचर्चित मामले में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने 12 फरवरी को सीबीआई और सभी आरोपितों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सार्वजनिक किया गया। यह निर्णय राजधानी की राजनीति में एक नए मोड़ का संकेत दे रहा है।

- Advertisement -

दिल्ली शराब घोटाला: केजरीवाल और सिसोदिया को कोर्ट से बड़ी राहत, आरोपों से हुए मुक्त

यह मामला वर्ष 2022 की विवादित दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। जब यह प्रकरण दर्ज किया गया था, उस समय अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री और मनीष सिसोदिया उपमुख्यमंत्री के पद पर कार्यरत थे। जांच एजेंसी सीबीआई ने 2022 में पहला आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसके बाद कई अनुपूरक आरोप पत्र भी दायर किए गए। एजेंसी का आरोप था कि ‘दक्षिण लॉबी’ नामक एक समूह ने इस नीति को अपने पक्ष में प्रभावित करने के लिए 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इस आबकारी नीति मामला ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी थी।

- Advertisement -

सीबीआई ने कुल 23 आरोपितों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किए थे, जिसमें कई नामचीन चेहरे शामिल थे। इनमें केजरीवाल और सिसोदिया के अतिरिक्त के. कविता, कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण रामचंद्र पिल्लई, मूथा गौतम, समीर महेंद्रु, अमनदीप सिंह ढल, अर्जुन पांडे, बुच्चीबाबू गोरंटला, राकेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, चनप्रीत सिंह रायट, अरविंद कुमार सिंह, दुर्गेश पाठक, अमित अरोरा, विनोद चौहान, आशीष माथुर और पी सरथ चंद्र रेड्डी जैसे व्यक्ति शामिल थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन सभी पर दिल्ली की आबकारी नीति मामला में संलिप्तता का आरोप था।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Amit Shah Rahul Gandhi: अमित शाह राहुल गांधी पर बरसे: क्या उन्हें इतनी समझ भी नहीं है कि नाश्ता कहां करना चाहिए?

दिल्ली शराब घोटाला: आरोपों से बरी होने के मायने

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल डीपी सिंह और अधिवक्ता मनु मिश्रा ने अपना पक्ष रखा। एजेंसी ने अदालत में यह तर्क दिया कि आपराधिक साजिश के अपराध को समग्रता में देखा जाना चाहिए और साक्ष्यों की पर्याप्तता का परीक्षण मुकदमे के दौरान किया जाना चाहिए। सीबीआई का कहना था कि सभी आरोपितों के विरुद्ध आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है। उन्होंने अपने पक्ष में कई दलीलें पेश कीं।

वहीं, अरविंद केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दमदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को कथित साजिश से जोड़ने वाला कोई ठोस या आपराधिक सामग्री उपलब्ध नहीं है। हरिहरन ने इस बात पर जोर दिया कि चौथे अनुपूरक आरोप पत्र में केजरीवाल का नाम जोड़ा गया, जो पूर्व आरोपों की पुनरावृत्ति मात्र है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि केजरीवाल अपना आधिकारिक कर्तव्य निभा रहे थे और किसी भी नीति का निर्माण सरकार की सामूहिक प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा होता है।

बचाव पक्ष ने इस तथ्य पर भी बल दिया कि प्रारंभिक आरोप पत्र और पहले तीन अनुपूरक आरोप पत्रों में केजरीवाल का नाम नहीं था। उनका नाम केवल चौथे अनुपूरक आरोप पत्र में सामने आया। बचाव पक्ष ने आगे की जांच की आवश्यकता और आधार पर भी प्रश्न उठाए तथा सरकारी गवाह राघव मगुंटा के बयान सहित अन्य बयानों की साक्ष्यात्मक महत्ता पर संदेह व्यक्त किया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

अदालत ने सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने और प्रस्तुत दस्तावेजों का गहन अवलोकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि उपलब्ध सामग्री आरोप तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने केजरीवाल और सिसोदिया को आरोपों से मुक्त कर दिया। इस फैसले के साथ ही इस बहुचर्चित मामले में एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। यह निर्णय न्यायपालिका की निष्पक्षता का एक और उदाहरण पेश करता है।

यह भी पढ़ें:  Patna Metro: पटना मेट्रो को रेलवे की NOC मिली, कॉरिडोर-2 में सुरंग खुदाई ने फिर पकड़ी रफ्तार

अदालत का फैसला और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में व्यापक प्रतिक्रिया देखी गई। आम आदमी पार्टी ने इसे सत्य की जीत और न्याय की विजय बताया, वहीं विरोधी दलों ने मामले के व्यापक पहलुओं पर अभी भी चर्चा की आवश्यकता जताई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय जांच एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है कि आरोप पत्र दाखिल करते समय साक्ष्यों की मजबूती और प्रमाणिकता अत्यंत आवश्यक होती है।

यह भी पढ़ें:  Assembly Election: पांच राज्यों- असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी चुनावी में शंखनाद, बंगाल में दो चरण, बाकी जगह एक फेज में वोटिंग, जानें पूरा शेड्यूल

हालांकि, आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या जांच एजेंसी इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देती है या नहीं। फिलहाल, राउज एवेन्यू अदालत का यह फैसला राजधानी की राजनीति और आगामी चुनावों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। यह निर्णय राजनीतिक विश्लेषकों के बीच गहन चर्चा का विषय बन गया है।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

अब टैलेंट नहीं कुंडली देखकर मिल रहा काम! फलक नाज ने खोली टीवी इंडस्ट्री की पोल

Falaq Naazz News: टेलीविजन की दुनिया, जहां सितारों की चमक और संघर्ष की कहानियां...

Oscars 2026: जानिए किन फिल्मों और एक्टर्स के नाम है सबसे ज्यादा अकादमी अवॉर्ड्स का रिकॉर्ड!

Oscars News: हर साल की तरह इस साल भी हॉलीवुड के सितारों का मेला...

OnePlus 13: अमेजन पर धमाकेदार डील, क्या आपको खरीदना चाहिए यह फोन?

OnePlus 13: स्मार्टफोन बाजार में प्रीमियम डिवाइसेस को लेकर उत्साह हमेशा चरम पर रहता...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें