Kishanganj ID Fraud: भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश की सरहदों पर पहचान से जुड़ी साजिशें एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के माथे पर बल ला दिया है। गंगा-जमुनी तहजीब की चादर ओढ़े इस सीमावर्ती इलाके में चल रहा यह खेल अब केवल स्थानीय धोखाधड़ी नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का एक बड़ा नेटवर्क साबित हो रहा है।
Kishanganj ID Fraud: किशनगंज में पहचान से जुड़ी साजिश का पर्दाफाश, UP ATS की बड़ी कार्रवाई
Kishanganj ID Fraud: सीमावर्ती जिले में कैसे बिछा जाल?
बिहार के किशनगंज जिले में, जो भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश की रणनीतिक सीमाओं से सटा है, एक बार फिर पहचान से जुड़ी गंभीर साजिश ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद हराम कर दी है। उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (UP ATS) की हालिया कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चल रहा यह आईडी फ्रॉड अब केवल सामान्य धोखाधड़ी का मामला नहीं रहा।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों की मानें तो यह फर्जी पहचान बनाने का रैकेट स्थानीय स्तर से कहीं आगे बढ़कर, सुनियोजित तरीके से राष्ट्र विरोधी तत्वों द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका मकसद संवेदनशील सूचनाएं जुटाना और भारत में अवैध घुसपैठ को आसान बनाना हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
UP ATS ने अपनी जांच में पाया है कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां भारतीय नागरिकता के दस्तावेज़ों का दुरुपयोग कर, गैर-कानूनी तरीके से घुसपैठियों को भारतीय पहचान दी जा रही थी। इस काम में स्थानीय दलाल और कुछ सरकारी विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
फर्जी पहचान के दस्तावेज़ों का जाल
इस बड़े नेटवर्क में आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पैन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण पहचान पत्रों को बनाने के लिए जाली दस्तावेजों का उपयोग किया जा रहा है। ये फर्जी पहचान पत्र न केवल सामान्य जीवन में, बल्कि सरकारी योजनाओं और अन्य संवेदनशील कार्यों में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रही है, क्योंकि फर्जी पहचान वाले लोग आसानी से देश के किसी भी हिस्से में छिप सकते हैं और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
UP ATS की कार्रवाई ने ऐसे कई मोहरों को पकड़ा है जो इस पूरे रैकेट का हिस्सा थे। उनसे गहन पूछताछ जारी है और इसके पीछे के बड़े आकाओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और आगे की कार्रवाई
किशनगंज जैसे संवेदनशील जिले में इस तरह की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा पर निगरानी को और मजबूत करने के साथ-साथ, स्थानीय खुफिया तंत्र को भी अधिक सक्रिय किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी साजिश को नाकाम किया जा सके।
सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और सभी संबंधित विभागों को इस तरह के आईडी फ्रॉड पर नकेल कसने के निर्देश दिए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

