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फ़रवरी, 14, 2026
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Kishtwar Encounter: पहाड़ों में जैश का ‘सप्लाई हाउस’ ध्वस्त, एक कमांडो शहीद, जानें ऑपरेशन त्राशी-I की अदम्य साहस वाली कहानी

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Kishtwar Encounter: आतंक की स्याह रात में, जब खौफ के परछाईं लंबे होने लगीं, तब देश के जांबाजों ने सूरज की पहली किरण बनकर अंधेरे को चीर दिया। किश्तवार के दुर्गम पहाड़ों में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने एक अभेद्य किला बना रखा था, जिसे ध्वस्त करने में सुरक्षाबलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। इस भीषण Kishtwar Encounter के दौरान एक जांबाज ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

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किश्तवार के ऊंचे पहाड़ों में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े आतंकवादियों ने लंबे समय तक छिपने की योजना बनाई थी। पत्थरों की कतारों से सावधानीपूर्वक सुरक्षित किए गए एक मजबूत बंकर में महीनों तक रहने के लिए पर्याप्त सामान जमा था, जो एक लंबे समय तक छिपने की तैयारी का संकेत देता है। सेना ने एक गहन आतंकवाद विरोधी अभियान के बाद इस बंकर का भंडाफोड़ किया, जिसमें एक कमांडो ने शहीद हो गए और कई अन्य घायल हो गए।

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Kishtwar Encounter में जैश का बंकर था महीनों के ठिकाने की तैयारी

बंकर से बरामद हुआ सामान, आतंकवादियों की लंबी तैयारी का सबूत है। सुरक्षाबलों को कम से कम 50 पैकेट नूडल्स, टमाटर और आलू का एक पूरा क्रेट, 15 प्रकार के मसाले, 10 किलो बासमती चावल के दो बोरे, दाल, गेहूं और बाजरे के बोरे, दो बड़े एलपीजी सिलेंडर, बर्नर और सूखी लकड़ी मिली। यह सभी वस्तुएं इंगित करती हैं कि आतंकी लंबे समय तक इस JeM hideout में छिपे रहने की फिराक में थे। इसी दौरान, गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुए एक पैराट्रूपर ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। यह जानकारी आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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ऑपरेशन त्राशी-I की शुरुआत रविवार देर रात चत्रू क्षेत्र के मन्द्रल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव में हुई, जब सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों से संपर्क स्थापित किया। प्रारंभिक मुठभेड़ में आठ सैनिक घायल हो गए, जिनमें से अधिकांश ग्रेनेड हमले के छर्रों से घायल हुए थे। इलाके में दो से तीन आतंकवादियों के छिपे होने का संदेह है।

दुष्कर भौगोलिक स्थिति और चुनौतियों के बावजूद जारी अभियान

अधिकारियों ने बताया कि दुर्गम भूभाग, घनी वनस्पति और खड़ी ढलानों के कारण दृश्यता और आवागमन में भारी बाधा उत्पन्न हुई, जिसके चलते अभियान को रात भर के लिए रोकना पड़ा। सोमवार तड़के इसे फिर से शुरू किया गया। भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने बताया कि चत्रू क्षेत्र में ऑपरेशन त्राशी-I लगातार जारी है। घेराबंदी और कड़ी कर दी गई है और तलाशी अभियान का दायरा बढ़ाया गया है। पुलिस और सीआरपीएफ के जवान भी इलाके में तैनात हैं ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

आतंकवादियों को भागने से रोकने के लिए सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कई टीमें ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से इलाके की तलाशी ले रही हैं। सुरक्षा घेरा काफी मजबूत कर दिया गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि

इसी बीच, घायल सैनिकों में से एक, हवलदार गजेंद्र सिंह ने 18 और 19 जनवरी की दरमियानी रात को जम्मू के एक सैन्य अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। व्हाइट नाइट कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग और सभी रैंकों ने विशेष बलों के हवलदार गजेंद्र सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सिंहपोरा क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन त्राशी-I के दौरान आतंकवाद विरोधी अभियान को बहादुरी से अंजाम देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। हम उनके अदम्य साहस, वीरता और कर्तव्य के प्रति निस्वार्थ समर्पण को नमन करते हैं और इस गहरे दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। यह आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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