KRK Yogi Adityanath: सोशल मीडिया की दुनिया में जहां हर खबर एक चिंगारी बनकर फैलती है, वहीं कुछ चिंगारियां ऐसे भी होती हैं जो आग तो लगाती हैं, पर खुद ही राख बन जाती हैं। साल के पहले ही दिन ऐसा ही कुछ हुआ जब मूवी क्रिटिक कमाल खान, जिन्हें केआरके के नाम से जाना जाता है, ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर एक आपत्तिजनक और फर्जी पोस्ट साझा कर दिया। इस पोस्ट के बाद मचे बवाल के चलते उन्हें न सिर्फ इसे हटाना पड़ा, बल्कि हाथ जोड़कर माफी भी मांगनी पड़ी।
KRK Yogi Adityanath: योगी आदित्यनाथ पर फर्जी पोस्ट डालना केआरके को पड़ा भारी, मांगनी पड़ी माफी, दर्ज हुई FIR
KRK Yogi Adityanath मामले में FIR दर्ज, जानें पूरा विवाद
कमाल खान ने एक ऐसी पोस्ट साझा की जिसकी सच्चाई जानने या उसके तथ्यों को सत्यापित करने की जरा सी भी जहमत नहीं उठाई। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसी शख्सियत पर बिना पुष्टि के एक फर्जी पोस्ट कर डाला, जिसके बाद हंगामा खड़ा हो गया। इस पोस्ट के फौरन बाद उन्हें उसे डिलीट करना पड़ा और मुख्यमंत्री से माफी भी मांगनी पड़ी। हालांकि, उनकी माफी पर्याप्त साबित नहीं हुई।
लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में केआरके के खिलाफ एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई है। यह एफआईआर लखनऊ के नरही इलाके के राजकुमार तिवारी की शिकायत पर आधारित है। तिवारी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि केआरके ने योगी आदित्यनाथ के बारे में फर्जी पोस्ट साझा करके हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और उत्तर प्रदेश सरकार की छवि खराब करने का प्रयास किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने लिखा, “एक फर्जी अखबार की क्लिपिंग का इस्तेमाल करके महाराज जी (योगी आदित्यनाथ) के नाम से एक झूठा और फर्जी बयान दिया गया है। यह उनकी छवि खराब करने का प्रयास है, जो निंदनीय है। इससे हिंदू समुदाय में आक्रोश फैल गया है।” पुलिस ने कमाल खान के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
फर्जी खबर फैलाने पर कानूनी कार्रवाई
अपने माफीनामे वाले पोस्ट में कमाल खान ने यह स्वीकार किया कि उन्हें बाद में पता चला कि यह एक फर्जी खबर थी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पोस्ट को डिलीट कर दिया। उन्होंने भविष्य में और अधिक सचेत रहने की बात भी कही। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर तथ्यों की जांच और जिम्मेदारी से सामग्री साझा करने के महत्व को रेखांकित किया है। सोशल मीडिया पर फर्जी जानकारी और गलत सूचनाओं का प्रसार एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिसके सामाजिक और कानूनी परिणाम हो सकते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद ज़रूरी है। यह घटना दर्शाती है कि बिना पुष्टि के किसी भी व्यक्ति या संस्थान के बारे में जानकारी फैलाना कितना हानिकारक हो सकता है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







