
Lok Sabha Seat Increase: देश की सियासत में इन दिनों लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर जबरदस्त हलचल है। संसद के विशेष सत्र से पहले ये चर्चाएं गरम हैं कि मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 तक किया जा सकता है। सरकार इस संबंध में कई अहम विधेयक लाने की तैयारी में है, जिनमें महिलाओं को आरक्षण देने और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।
लोकसभा सीटों की संख्या क्यों बढ़ाई जा सकती है?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी परिसीमन प्रक्रिया के बाद लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। चर्चा है कि संविधान संशोधन, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित क्षेत्रों से संबंधित संशोधन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव संसद में पेश किए जा सकते हैं। इन्हीं के साथ लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को लगभग 850 तक करने की अटकलें तेज हैं। इस संभावित Lok Sabha Seat Increase के पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में, सभी राज्यों की लोकसभा हिस्सेदारी में समान रूप से बढ़ोतरी की जा सकती है, जिससे वर्तमान अनुपात बरकरार रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह कदम उन दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है, जिन्हें डर है कि परिसीमन के बाद उनकी संसदीय शक्ति घट सकती है।
दक्षिणी राज्यों की चिंता और वैकल्पिक मॉडल
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि 2011 की जनगणना को आधार नहीं बनाया जाएगा, जिसका अर्थ है कि राज्यों के बीच मौजूदा सीट अनुपात में बड़े बदलाव की संभावना कम है। इससे दक्षिण भारत के उन राज्यों को राहत मिल सकती है, जो जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के कारण अपनी सीटों में संभावित कटौती को लेकर चिंतित थे।
इस मुद्दे पर तमिलनाडु में राजनीतिक विरोध मुखर है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया दक्षिणी और उत्तरी राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई फैसला लिया गया तो राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी एक वैकल्पिक मॉडल का सुझाव दिया है। उन्होंने दक्षिणी राज्यों और पुडुचेरी के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर प्रस्ताव दिया है कि अतिरिक्त सीटों में से आधी सीटें जनसंख्या के अनुपात पर और शेष सीटें राज्यों के आर्थिक प्रदर्शन तथा अन्य मानकों के आधार पर आवंटित की जाएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
आगे क्या होगा?
Lok Sabha Seat Increase को लेकर पूरे देश की निगाहें अब संसद के विशेष सत्र पर टिकी हैं। यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है तो यह स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास का सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव साबित होगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







