

Davos Summit: वैश्विक मंच पर राज्यों की चमक बिखेरने की होड़, या जनता के पैसों पर ‘पिकनिक’ का मेला? महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसे ही तीखे सवाल हवा में तैर रहे हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का दावोस दौरा राज्य की राजनीति में भूचाल ले आया है।
Davos Summit में फडणवीस का जलवा या संजय राउत का ‘पिकनिक’ वाला वार? महाराष्ट्र में मचा सियासी घमासान
Davos Summit: क्या है इस दौरे का असली मकसद?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने मुख्यमंत्री के दावोस दौरे को ‘पिकनिक’ करार देते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्री हर साल इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर, जैसे कि यह Davos Summit, जाकर क्या सिद्ध करना चाहते हैं। राउत का कहना है कि यह सारा ‘तमाशा’ जनता के पैसे पर होता है और जो समझौते दावोस में किए जा रहे हैं, वे मुंबई में बैठकर भी हो सकते थे। भारतीय परिप्रेक्ष्य से उन्होंने इस सम्मेलन को हास्यास्पद बताया।
राउत ने मुख्यमंत्री से यह भी मांग की कि वे देश और राज्य को दावोस यात्रा पर हुए कुल खर्च का ब्योरा दें। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सरकार द्वारा निवेश और रोजगार के जो आंकड़े बताए जा रहे हैं, वे सही हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बयान मुख्यमंत्री के दावोस दौरे के बाद सामने आया है, जहां उन्होंने राज्य के लिए बड़े निवेश का दावा किया था।
अमृता फडणवीस का करारा जवाब और सरकार के दावे
संजय राउत के इन आरोपों का जवाब मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस ने दिया है। उन्होंने राउत के बयान को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। अमृता फडणवीस ने स्पष्ट किया कि पिकनिक पर जाने वाला व्यक्ति सुबह छह बजे से रात ग्यारह बजे तक लगातार बैठकों और सम्मेलनों में व्यस्त नहीं रहता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने दावोस को एक वैश्विक मंच बताया, जहां दुनिया भर के प्रतिनिधि मिलते हैं और Maharashtra में निवेश के नए मार्ग खुलते हैं। उनके अनुसार, ऐसे मंच पर जाना हर राज्य प्रमुख की जिम्मेदारी है।
महाराष्ट्र सरकार ने दावोस से बड़ी उपलब्धियों का दावा किया है। विश्व आर्थिक मंच के पहले ही दिन राज्य सरकार ने चौदह लाख पचास हजार करोड़ रुपये के 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ये विशाल Maharashtra में निवेश हरित ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, इस्पात निर्माण, आईटी, डाटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, जहाज निर्माण और डिजिटल ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होंगे। सरकार का दावा है कि इन समझौतों से राज्य में पंद्रह लाख रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/
दावे और हकीकत: कितना सफल रहा दावोस का यह दौरा?
यह देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र सरकार के ये दावे हकीकत में कितने सफल होते हैं और भविष्य में राज्य की अर्थव्यवस्था पर इनका क्या प्रभाव पड़ता है। चुनावी मौसम से पहले ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उपस्थिति और वहां से लाए गए निवेश के आंकड़े अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बनते हैं, और यह दौरा भी उसका अपवाद नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


