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फ़रवरी, 21, 2026
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पुनौराधाम में 23वें अंतरराष्ट्रीय Maithili Conference: सांस्कृतिक महफिल में समा, ना श्रोता थके, ना ही कलाकार

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Maithili Conference: सुरों की महफ़िल ऐसी सजी कि श्रोता गोता लगाते रहे आनंद के अथाह सागर में, हर पल रहा मंत्रमुग्ध कर देने वाला। पुनौराधाम में अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन के 23वें मैथिली अधिकार दिवस समारोह ने सांस्कृतिक विरासत को एक नई ऊंचाई दी है।

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पुनौराधाम में 23वें अंतरराष्ट्रीय Maithili Conference: सांस्कृतिक महफिल ने बांधे रखा समा, कलाकारों को मिला सम्मान

मैथिली संस्कृति का अद्भुत संगम: Maithili Conference में कलाकारों ने बिखेरा जलवा

पुनौराधाम, सीतामढ़ी। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन का 23वां मैथिली अधिकार दिवस समारोह मंगलवार देर शाम संपन्न हो गया। इस गरिमामय आयोजन में मैथिली मंच के स्थापित कलाकारों की प्रस्तुतियों ने लगातार श्रोताओं को अपनी ओर खींचे रखा। यहां ना श्रोता थके, ना ही कलाकार। डॉ. ममता ठाकुर के मंगलाचरण, केदारनाथ कुमर के गणेश वंदना और डॉ. सुषमा झा के पारंपरिक गीतों से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। गायकी की इस पारी की शुरुआत मैथिली मंच की सुपरिचित गायिका डॉली सिंह और रचना झा ने मनोहारी मिथिला वर्णन के गायन से बखूबी की। जैसे ही उन्होंने पारंपरिक लोक धुन पर अपनी स्वर लहरी छेड़ी, पूरा दर्शक दीर्घा भाव विभोर हो गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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माधव राय और रामसेवक ठाकुर की युगलबंदी में भक्ति के भावों ने दर्शकों को आत्मविभोर किया, तो वहीं पं. कुंज बिहारी मिश्र, कृष्ण कुमार ठाकुर कन्हैया और रूपेश सिंह जैसे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गंभीर किंतु मनमोहक सांस्कृतिक गीतों ने जोरदार तालियां बटोरीं। दुखियारी राम रसिया की प्रस्तुति, जिसमें महिला और पुरुष दोनों की आवाज का अद्भुत मेल था, दर्शकों के लिए विशेष रूप से रोमांचक अनुभव रहा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। नटराज डांस एकेडमी के निदेशक मोहित खंडेलवाल की टीम द्वारा जानकी के प्राकट्य से लेकर उनके परिणय संस्कार तक केंद्रित नृत्य नाटिका ने दर्शकों को विशेष रूप से मंत्रमुग्ध किया। इस आयोजन में मैथिली लोक संगीत की विविध छटाएं देखने को मिलीं।

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राम सेवक ठाकुर, प्रवीण कुमार झा और अंजनी मिश्र के संयुक्त संचालन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के फरमाइशी गीतों के अंतिम चरण में कुंजबिहारी मिश्र, माधव राय, रचना झा, केदारनाथ कुमर और कृष्ण कुमार कन्हैया की गायकी का जादू एक बार फिर दर्शकों के सिर चढ़कर बोला और वे अंत तक डटे रहे।

संगत कलाकारों ने भी जमाया रंग, मिली वाहवाही

इस सांस्कृतिक संध्या के दौरान गायकों के साथ-साथ संगत कलाकारों ने भी अपनी उंगलियों का जादू बिखेरा। तबला पर हीरा कुमार झा और मनोज ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं, नाल पर कल्लू ने भी अपनी उंगलियों का खूब जादू दिखाया। ऑर्गन पर राम बहादुर दास और पैड पर रूपेश सिंह दर्शकों के विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहे। जबकि बैंजो पर शिवकुमार एक बार फिर से दर्शकों का मन मोहने में सफल रहे। पैड पर केशव और अभिजीत की प्रस्तुतियों की भी लोगों ने खूब सराहना की। मैथिली लोक संगीत के इस महाकुंभ में सभी ने अपनी कला का जौहर दिखाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

मैथिली रत्न और जानकी सेवा सम्मान से नवाजे गए कलाकार

मैथिली गीत-संगीत के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से निरंतर प्रगति की दिशा में अग्रसर करने में अतुलनीय योगदान के लिए मंगलवार को नटराज डांस एकेडमी के निदेशक मोहित खंडेलवाल, माधव राय और रचना झा को ‘मैथिली रत्न’ से सम्मानित किया गया। वहीं, मैथिली मंच की नवोदित गायिका डॉली सिंह को ‘जानकी सेवा सम्मान’ से नवाजा गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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