



Rajya Sabha Speech: खरगे ने लगाए गंभीर आरोप
Rajya Sabha Speech: राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान दिए गए उनके भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिना किसी उचित कारण के संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया है। खरगे ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि हटाए गए अंशों में सरकार की नीतियों की आलोचनाएं शामिल थीं, जिन्हें विपक्ष के सदस्य के रूप में उठाना उनका संवैधानिक कर्तव्य है। उन्होंने इन हटाए गए अंशों को तत्काल बहाल करने की अपील भी की।
उच्च सदन में अपनी बात रखते हुए खरगे ने बताया कि 4 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस के दौरान उन्होंने जो कुछ कहा था, वह अब पूरी तरह से रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा, “जब मैंने राज्यसभा की वेबसाइट पर अपलोड किया गया वीडियो देखा, तो मैंने पाया कि मेरे भाषण का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी ठोस कारण के हटा दिया गया है।” उन्होंने आगे बताया कि हटाए गए हिस्सों में मौजूदा सरकार के कामकाज पर उनकी टिप्पणियां और तथ्यात्मक संदर्भ थे। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री की कुछ नीतियों पर भी सवाल उठाए थे, जो उनके मुताबिक, एक विपक्षी सांसद के तौर पर उनका फर्ज है, खासकर तब जब ये नीतियाँ आम जनता पर नकारात्मक असर डाल रही हों। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
खरगे ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि उन्होंने पाँच दशकों से भी अधिक समय तक विधायक और सांसद के रूप में देश की सेवा की है। इस दौरान उन्होंने हमेशा गरिमा, संसदीय शिष्टाचार और भाषा की मर्यादा का पूरा सम्मान किया है। उन्होंने विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया कि उनके भाषण के जिन अंशों को हटाया गया है, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए। उनका तर्क था कि हटाए गए हिस्सों में कोई भी असंसदीय या मानहानिकारक शब्द नहीं था, और न ही वे संसद के नियम 261 का किसी भी तरह से उल्लंघन करते हैं। उनका मानना था कि उनके भाषण के इतने बड़े हिस्से को रिकॉर्ड से हटाना सीधे तौर पर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
अध्यक्ष का जवाब और वित्त मंत्री का पक्ष
खरगे की इस मांग पर राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हटाए गए अंशों को फिर से बहाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने खरगे की बात पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस मामले पर अध्यक्ष को निर्देश देना उचित और लोकतांत्रिक नहीं है। राधाकृष्णन ने कड़े शब्दों में कहा, “यह सही नहीं है, यह लोकतांत्रिक नहीं है, आप अध्यक्ष को निर्देश दे रहे हैं।” इस मुद्दे पर बाद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि खरगे ने अध्यक्ष के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। सीतारमण ने उन संसदीय नियमों का हवाला दिया, जो अध्यक्ष को मानहानिकारक, अभद्र, असंसदीय या अशोभनीय माने जाने वाले शब्दों और अंशों को सदन के रिकॉर्ड से हटाने का अधिकार देते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।




