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जनवरी, 7, 2026

पश्चिम बंगाल मतदाता सूची में ‘गंभीर खामियां’, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से तत्काल रोकने को कहा

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पश्चिम बंगाल मतदाता सूची: लोकतन्त्र की बुनियाद में मतदाता सूची एक मजबूत ईंट की तरह होती है, और जब इसमें ही दरारें पड़ने लगें, तो सियासी गलियारों में तूफान उठना लाज़मी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है।

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पश्चिम बंगाल मतदाता सूची में ‘अनियोजित’ संशोधन पर सवाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को एक कड़ा पत्र लिखकर राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को तत्काल रोकने की मांग की है। व्यापक अनियमितताओं, प्रक्रियात्मक खामियों और प्रशासनिक अव्यवस्था का हवाला देते हुए उन्होंने चेतावनी दी है कि इस गड़बड़ी से लाखों लोगों के मताधिकार छिन सकते हैं और भारत के लोकतांत्रिक आधार को नुकसान पहुंच सकता है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए जब पश्चिम बंगाल मतदाता सूची का सही होना अत्यंत आवश्यक है। 3 दिसंबर को लिखे गए इस पत्र ने महत्वपूर्ण चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और चुनाव आयोग के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। बनर्जी के इस ममता बनर्जी का पत्र में एसआईआर को “अनियोजित, अपर्याप्त तैयारी वाला और तदर्थ” विफलता बताया है, जो “गंभीर अनियमितताओं, प्रक्रियागत उल्लंघनों और प्रशासनिक चूक” से भरी हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया को उचित तैयारी के बिना जल्दबाजी में पूरा किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दोषपूर्ण आईटी सिस्टम, विरोधाभासी दिशानिर्देश और अपर्याप्त रूप से प्रशिक्षित अधिकारी सामने आए।

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उन्होंने जोर देकर कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और यह हमारे लोकतंत्र के मूल ढांचे और संविधान की भावना पर प्रहार करती है। उन्होंने इसे चुनावी निष्पक्षता पर सीधा हमला बताया। उनका कहना है कि यह समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि संशोधन का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन करना है, लेकिन इससे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में वैध मतदाताओं के बाहर होने का खतरा है। बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि एसआईआर को बिना किसी रोक-टोक के आगे बढ़ने देने से अपरिवर्तनीय क्षति होगी, योग्य मतदाताओं का बड़े पैमाने पर मताधिकार हनन होगा और लोकतांत्रिक शासन के मूलभूत सिद्धांतों पर सीधा हमला होगा।

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यह भी पढ़ें:  भागलपुर में फर्जी रजिस्ट्री रैकेट का भंडाफोड़: "Bhagalpur Land Fraud" पर सरकार का बड़ा एक्शन

पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल

बनर्जी ने विशेष खामियों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनमें सुनवाई के दौरान बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) को अनुमति न देना शामिल है, जिससे उनके अनुसार “निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता” को ठेस पहुंचती है। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों के पास पर्याप्त प्रशिक्षण का अभाव है, जिससे इस महत्वपूर्ण सत्यापन प्रक्रिया में त्रुटियां बढ़ जाती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने चुनाव आयोग को उसकी देखरेख में हुई किसी भी “अवैध, मनमानी या पक्षपातपूर्ण कार्रवाई” के लिए “पूरी तरह से जिम्मेदार” ठहराया है और ममता बनर्जी का पत्र में आईटी खामियों और असंगत निर्देशों को तुरंत ठीक करने की मांग की है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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