Mayawati News: सियासत के अखाड़े में बयानबाजी और दावों का खेल पुराना है, लेकिन जब बात बहनजी की हो तो हर शब्द मायने रखता है। उनके जन्मदिन के मौके पर हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, धुआं सिर्फ उपकरण से नहीं उठा, बल्कि सियासी हलकों में भी गरमाहट पैदा कर गया।
Mayawati News: जन्मदिन पर मायावती का ‘ब्राह्मण’ दांव, क्या फिर काम आएगी सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति?
Mayawati News: प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यवधान और बसपा का सियासी संदेश
बसपा सुप्रीमो मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस वक्त अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब एक प्रकाश उपकरण से धुआं निकलने लगा। यह घटना उनके जन्मदिन के अवसर पर हुई थी, जहां वे अपनी पार्टी और गठबंधन की उपलब्धियों पर बात कर रही थीं। इस दौरान मायावती ने तीखे लहजे में कहा कि कांग्रेस और भाजपा लगातार देश में बसपा आंदोलन को कमजोर करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती रहती हैं। उन्होंने ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक का भी जिक्र किया और अत्याचारों तथा अन्याय पर उनकी चिंता को स्वाभाविक बताया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मायावती ने साफ तौर पर कहा कि बसपा ने हमेशा ब्राह्मणों को उचित सम्मान दिया है और उन्हें किसी की ‘भीख’ की जरूरत नहीं है। उन्होंने ब्राह्मण समुदाय से भाजपा, सपा या कांग्रेस के बहकावे में न आने की अपील की। बसपा सरकार बनने पर ब्राह्मणों को पूरा सम्मान देने के साथ-साथ, क्षत्रिय और जाट समुदायों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों का भी हमेशा की तरह ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके शासनकाल में कभी भी किसी मंदिर, मस्जिद या गिरजाघर को तोड़ा नहीं गया। यह बसपा की ‘सामाजिक समीकरण’ साधने की रणनीति का अहम हिस्सा है।
बसपा की सोशल इंजीनियरिंग: एक सफल प्रयोग का इतिहास
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती ने 2007 में एक बड़ा प्रयोग किया था, जिसे ‘सामाजिक इंजीनियरिंग’ का नाम दिया गया। बसपा की ‘सामाजिक इंजीनियरिंग’ दरअसल एक ऐसा ‘सामाजिक समीकरण’ था, जिसमें दलितों के साथ ब्राह्मणों को भी जोड़ा गया। इस चुनाव में उन्होंने 86 विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण उम्मीदवारों को मैदान में उतारा। बसपा का चुनाव चिन्ह हाथी, जो पारंपरिक रूप से दलितों से जुड़ा था, एक नए नारे के साथ आगे बढ़ा: “ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी आगे बढ़ेगा।” मायावती ने तब कहा था कि हाथी सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक है।
यह रणनीति 2007 में बेहद कारगर साबित हुई। बसपा के टिकट पर 41 ब्राह्मण उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की और मायावती ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। अब एक बार फिर, मायावती इसी सफल प्रयोग को दोहराने की कोशिश करती नजर आ रही हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
भाजपा और सपा पर मायावती के तीखे हमले
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने समाजवादी पार्टी की सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार हमेशा से गुंडागर्दी और अराजकता से भरी रही है। मायावती ने अपने ऊपर हुए स्टेट गेस्ट हाउस हमले और दलितों के खिलाफ अत्याचारों का जिक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि बसपा सरकार ने हमेशा यादव समुदाय का ख्याल रखा है और आगे भी रखती रहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भाजपा सरकार पर बरसते हुए मायावती ने कहा कि आम जनता, खासकर दलित वर्ग, बहुत परेशान है और राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है। उन्होंने दावा किया कि जनता बसपा सरकार चाहती है। मायावती ने ईवीएम में धांधली का आरोप भी लगाया और कहा कि चुनाव मतपत्रों के जरिए होने चाहिए ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बना रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

