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फ़रवरी, 17, 2026
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Meghalaya Coal Mine Explosion: मेघालय कोयला खदान विस्फोट: पूर्वी जयंतिया हिल्स में 16 मजदूरों की मौत, कई फंसे

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Meghalaya Coal Mine Explosion: धरती के भीतर छिपा मौत का जाल, जहां कोयले की चमक में जिंदगी गुम हो जाती है। मेघालय की धरती ने एक बार फिर ऐसा ही दर्दनाक मंजर देखा है, जहां अवैध खदानों में दम घुटकर कई जिंदगियां काल के गाल में समा गईं।

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मेघालय कोयला खदान विस्फोट: बचाव अभियान जारी, अवैध खनन की आशंका

मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में गुरुवार को एक संदिग्ध अवैध कोयला खदान में हुए विस्फोट में कम से कम सोलह लोगों की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह दर्दनाक घटना थांगस्कू इलाके में हुई, जहां असम के कई मजदूर कोयला निकालने के कार्य में लगे थे। इस हादसे में कई अन्य मजदूर खदान के भीतर फंसे हुए बताए जा रहे हैं, जिन्हें निकालने का प्रयास जारी है।

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पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि खदान से अब तक 16 शव निकाले जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि कुछ घायल मजदूरों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है और गंभीर रूप से घायलों को आगे के इलाज के लिए शिलांग रेफर किया जाएगा। घटनास्थल पर तत्काल बचाव अभियान शुरू किया गया, जिसके लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की सहायता ली गई है। बचाव कार्य अभी भी जारी है और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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माना जा रहा है कि यह विस्फोट अवैध रूप से संचालित कोयला खनन स्थल पर हुई किसी गतिविधि के दौरान हुआ। जब अधिकारियों से खदान की वैधता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया, “हाँ, यह अवैध प्रतीत होता है।” विस्फोट के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।

अवैध खनन पर प्रतिबंध और रैट-होल खनन का खतरा

यह घटना मेघालय में अवैध कोयला खनन के गंभीर खतरों को एक बार फिर उजागर करती है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने 2014 में ही मेघालय में पर्यावरण को होने वाले नुकसान और मजदूरों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताओं के मद्देनजर रैट-होल कोयला खनन और अन्य अवैज्ञानिक खनन पद्धतियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसके साथ ही इस तरह से निकाले गए कोयले के अवैध परिवहन पर भी रोक लगा दी गई थी।

रैट-होल खनन एक अत्यंत खतरनाक तरीका है, जिसमें मजदूर कोयला निकालने के लिए संकरी सुरंगें खोदते हैं, जिनकी ऊंचाई आमतौर पर लगभग 3 से 4 फीट ही होती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी बाद में इस प्रतिबंध को बरकरार रखा था और केवल वैज्ञानिक एवं विनियमित प्रक्रियाओं के माध्यम से, उचित पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ कोयला खनन की अनुमति दी थी। इसके बावजूद, राज्य के कुछ हिस्सों में अवैध खनन जारी है, जो आए दिन ऐसी दुखद घटनाओं का कारण बनता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस घटना ने एक बार फिर इन अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता पर बल दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

न्याय और मुआवजा: क्या मिलेगी राहत?

इस दुखद हादसे ने उन परिवारों को तबाह कर दिया है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। सवाल यह उठता है कि इन अवैध गतिविधियों के पीछे कौन लोग हैं और क्या पीड़ितों को न्याय तथा उचित मुआवजा मिल पाएगा। सरकार और प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। जांच में इस बात का भी खुलासा होना चाहिए कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद ये अवैध खदानें कैसे संचालित हो रही थीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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