
Mithila Manuscripts: बिहार की ऐतिहासिक धरोहरें अब जल्द ही एक नए आयाम को छू सकती हैं। जदयू के राज्यसभा सांसद संजय झा ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर मिथिला की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण का मुद्दा उठाया है। उनकी मांग है कि दरभंगा स्थित मिथिला शोध संस्थान को राष्ट्रीय स्तर के ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ में शामिल किया जाए।
नई दिल्ली में मंगलवार को हुई इस अहम बैठक में सांसद संजय झा ने जोर देकर कहा कि इस पहल से मिथिला क्षेत्र में बिखरी पड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, उनका वैज्ञानिक सर्वेक्षण और डिजिटल संरक्षण संभव हो पाएगा।

केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से इस संस्थान को एक बड़े शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर भी विस्तृत चर्चा हुई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को एक औपचारिक पत्र भी सौंपा, जिसमें मिथिला की अमूल्य धरोहरों को सहेजने की बात कही गई।
Mithila Manuscripts: राष्ट्रीय मिशन से जुड़ने की अपील
संजय झा द्वारा सौंपे गए पत्र में बताया गया है कि मिथिला क्षेत्र में सदियों से ऐसी पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनका संबंध भारतीय ज्ञान परंपरा, ज्योतिष, गणित, चिकित्सा, दर्शन और सांस्कृतिक इतिहास से है। इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों का एक बड़ा हिस्सा अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर सूचीबद्ध नहीं हो पाया है। ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ से जुड़ने के बाद इन धरोहरों को संरक्षित करने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है और इन Mithila Manuscripts का डिजिटलीकरण बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा।
पांडुलिपियों के संरक्षण और शोध का भविष्य
संसद सदस्य संजय झा ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि दरभंगा स्थित मिथिला शोध संस्थान के बुनियादी ढांचे को राज्य सरकार के सहयोग से लगातार मजबूत किया जा रहा है। संस्थान में शोध सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है और पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। उनका विश्वास है कि केंद्र सरकार की ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ योजना से जुड़ने के बाद इस संस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिल सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह भी बताया गया कि मिथिला की कई पांडुलिपियां आज भी निजी संग्रहों और पारंपरिक परिवारों के पास मौजूद हैं। इन दस्तावेजों का वैज्ञानिक संरक्षण न होने के कारण इनके खराब होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यदि राष्ट्रीय मिशन के तहत सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण शुरू होता है, तो इन दुर्लभ दस्तावेजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।
केंद्रीय मदद से मिलेगा नया आयाम
माना जा रहा है कि इस पहल से मिथिला क्षेत्र में शोध और अकादमिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों पर अध्ययन करने वाले शोधार्थियों को मूल दस्तावेजों तक पहुंच आसान हो सकेगी, जिससे नए शोध प्रकल्पों की संभावनाएं बढ़ेंगी। संजय झा ने कहा कि मिथिला की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत देश की एक महत्वपूर्ण धरोहर है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लेगी और मिथिला शोध संस्थान भविष्य में पांडुलिपि संरक्षण और उन्नत शोध का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/





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