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West Asia conflict: पश्चिम एशिया संघर्ष पर PM Modi के भाषण पर गरमाई राजनीति, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल… पढ़िए राजनाथ की उच्च स्तरीय बैठक, PM ने बनाई टीम

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West Asia conflict: जब कूटनीति के पेंच ढीले पड़ने लगते हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर तलवारें खिंच जाती हैं, तब देश के भीतर बयानबाजी का बवंडर उठना स्वाभाविक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के West Asia conflict पर दिए गए बयान के बाद भारतीय राजनीति में बवाल मचा हुआ है।

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West Asia conflict: पश्चिम एशिया संघर्ष पर पीएम मोदी के भाषण पर गरमाई राजनीति, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल

West Asia conflict: विपक्ष ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने 24 मार्च को पश्चिम एशिया संघर्ष के संबंध में लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राउत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपना नियंत्रण खो चुके और निराश दिखाई दे रहे थे। उनका कहना था कि युद्ध शुरू होने के 25 दिन बाद प्रधानमंत्री सदन में आए और उनकी शारीरिक भाषा, हाव-भाव और भाषण से स्पष्ट था कि वे ‘अवसादग्रस्त’ हैं। राउत ने यह भी कहा कि ‘मोदी जी ने अपना आपा खो दिया है और ऐसा लगता है कि वे ज्यादा समय तक सत्ता में नहीं रहना चाहते। मोदी खुद ही सत्ता छोड़ देंगे,’ आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी मोदी के 25 मिनट के भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी, जिसके संदर्भ में राउत ने कहा कि इस गंभीर संकट के समय भाषण में अपेक्षित स्पष्टता का अभाव था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस विषय पर गहन संसदीय बहस होनी चाहिए। राउत ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने खुद कोरोना काल जैसी स्थिति दोबारा आने की आशंका जताई थी। यदि जनता और देश को किसी गंभीर स्थिति के बारे में जानकारी देनी है, तो विस्तृत चर्चा आवश्यक है।

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पीएम मोदी पर अमेरिका के दबाव का आरोप

राहुल गांधी ने भी पश्चिम एशिया के हालात को संभालने के प्रधानमंत्री के तरीके की कड़ी आलोचना की। उन्होंने प्रधानमंत्री पर अपने भाषण में अमेरिका का नाम न लेने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि वे तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘पूरी तरह से नियंत्रण में’ थे। वडोदरा में आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन में गांधी ने कहा, ‘मैंने सुना कि प्रधानमंत्री ने 25 मिनट का भाषण दिया। लेकिन मैं गारंटी देता हूं कि वे संसद में किसी बहस में हिस्सा नहीं ले सकते क्योंकि वे समझौता कर चुके हैं।’ राहुल ने आगे कहा, ‘नरेंद्र मोदी ने 25 मिनट तक भाषण दिया लेकिन अमेरिका के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से ट्रंप के नियंत्रण में हैं।’ आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

सोमवार को लोकसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष को ‘चिंताजनक’ बताया था। उन्होंने भारत पर इसके संभावित आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय प्रभावों पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने युद्धग्रस्त क्षेत्र के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों, विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस पर उसकी निर्भरता को रेखांकित किया और संघर्ष के दीर्घकालिक परिणामों के लिए भारत की तैयारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का राजनयिक रुख सभी पक्षों से तनाव कम करने का आग्रह करना रहा है। पीएम ने नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण जलमार्गों की नाकाबंदी की कड़ी निंदा की। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पश्चिम एशिया संघर्ष: दुनिया के नक्शे पर एक बार फिर अशांति का स्याह बादल गहराया है, जहां मानवीयता की चीखें सरहदों के पार सुनाई दे रही हैं। ऐसे में भारत, इस वैश्विक उथल-पुथल से अपने नागरिकों और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए हर मोर्चे पर मुस्तैद दिख रहा है।

पश्चिम एशिया संघर्ष: राजनाथ सिंह ने की उच्च स्तरीय बैठक, पीएम मोदी ने बनाई मंत्रियों की टीम

पश्चिम एशिया संघर्ष पर राजनाथ सिंह की समीक्षा बैठक: देश की सुरक्षा सर्वोपरि

पश्चिम एशिया संघर्ष: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में चल रही स्थिति की गहन समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में तीनों सेना प्रमुखों ने भाग लिया, जो देश की सुरक्षा तैयारियों को दर्शाता है। रक्षा मंत्री द्वारा आयोजित इस समीक्षा बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, डीआरडीओ प्रमुख, रक्षा सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चौथे सप्ताह में हुई है, जहां सरकार क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार कड़ी नजर रख रही है।

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इसी बीच, अमेरिकी युद्ध उप सचिव एलब्रिज कोल्बी वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करने के लिए भारत में हैं, जो वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति के मद्देनजर भारत के महत्व को रेखांकित करता है। इससे पहले, सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की थी। इस बैठक में आम लोगों की खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा समेत महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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सीसीएस की बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभावों से निपटने के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण के साथ समर्पित रूप से काम करने के लिए मंत्रियों और सचिवों का एक समूह गठित करने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह संघर्ष एक बदलती हुई स्थिति है और इससे पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में प्रभावित है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में, इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।

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प्रधानमंत्री मोदी ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंगों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। सीसीएस की बैठक में आवश्यक वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मध्यम और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संघर्ष का असर और भारत की तैयारी

सीसीएस की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा और भारत पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया तथा तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के उपायों पर चर्चा की गई। देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, सीसीएस ने खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा समेत आम आदमी की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भारत इस नाजुक भू-राजनीतिक स्थिति में अपने हितों की रक्षा और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस प्रकार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव केवल अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के गलियारों में भी नई बहस और आरोप-प्रत्यारोप को जन्म दे रहा है। जहां प्रधानमंत्री ने स्थिति की गंभीरता और भारत पर इसके प्रभावों को रेखांकित किया, वहीं विपक्षी दलों ने उनके संबोधन की मंशा और स्पष्टता पर सवाल उठाकर सरकार को घेरा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और क्या राजनीतिक रंग दिखाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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