RSS News: समय की रेत पर सौ साल का सफर, एक वैचारिक यात्रा जो अब नए पड़ावों की ओर बढ़ रही है। जिम्मेदारी का यह क्षण, शौर्य प्रदर्शन से परे, आत्मनिरीक्षण और एकजुटता का संदेश लिए हुए है।
RSS के सौ साल: मोहन भागवत ने कहा- ये ‘शौर्य’ नहीं, ‘जिम्मेदारी’ का पल
RSS शताब्दी समारोह: शक्ति प्रदर्शन से परे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में देशव्यापी हिंदू सम्मेलनों के आयोजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहे ये कार्यक्रम किसी ‘शौर्य’ या शक्ति प्रदर्शन का नहीं, बल्कि ‘जिम्मेदारी’ के बोध का क्षण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन शताब्दी समारोहों का उद्देश्य संघ की उपलब्धियों का बखान करना नहीं है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने और आत्मचिंतन करने का अवसर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
संघ की स्थापना के पीछे के प्रेरक प्रसंगों को याद करते हुए, सरसंघचालक ने बताया कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने अपने रक्त और संकल्प से इस संगठन की नींव रखी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में समाज के हर क्षेत्र में चुनौतियाँ और संकट दिख रहे हैं, लेकिन केवल समस्याओं पर विमर्श करने मात्र से समाधान नहीं मिलेगा। भागवत ने इस बात पर बल दिया कि हमारा ध्यान समस्याओं के मूल तक पहुँचने और उनके स्थायी समाधान खोजने पर केंद्रित होना चाहिए, न कि केवल सतही चर्चाओं पर। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक प्रेरक कहानी सुनाते हुए हिंदू समाज की वर्तमान दशा पर चिंतन किया और सभी से आत्मनिरीक्षण का आग्रह किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे अपने मन से हर प्रकार के भेदभाव को मिटाकर सच्चे सामाजिक सद्भाव की स्थापना की दिशा में सक्रिय हों। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
भारत की भाषाई विविधता और विश्वगुरु की परिकल्पना
भाषाई विविधता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, भागवत ने दृढ़ता से कहा कि भारत में बोली जाने वाली प्रत्येक भाषा राष्ट्रीय भाषा के समान है और सभी को बराबर सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की जोरदार वकालत की और नागरिकों से स्थानीय विनिर्माण तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहल का समर्थन करने का आग्रह किया। अपने सारगर्भित संबोधन के समापन में, सरसंघचालक ने सभी नागरिकों से भारत के संविधान का पूर्ण निष्ठा से पालन करने की अपील की। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में रविवार को उन्होंने कहा कि भारत को एक बार फिर ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए, न केवल किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण, बल्कि इसलिए कि यह वर्तमान विश्व की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि अब सनातन धर्म के पुनरुत्थान और उसके सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का उपयुक्त समय आ गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उन्होंने लगभग एक शताब्दी पूर्व की घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि योगी अरविंद ने भविष्यवाणी की थी कि सनातन धर्म का पुनरुत्थान ईश्वरीय इच्छा है, और इस पुनरुत्थान के लिए एक सशक्त हिंदू राष्ट्र का उदय अपरिहार्य है। यह उदय सामाजिक सद्भाव और एकात्मता के साथ ही संभव है।






