
Motihari Convocation: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बिहार की गौरवशाली परंपरा और वर्तमान में भारत की बढ़ती शक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बिहार को केवल इतिहास रचने वाली भूमि नहीं, बल्कि मानवता को नई दिशा देने वाला स्थल बताया, जहां से शांति और समरसता का संदेश विश्वभर में फैला।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने Motihari Convocation में अपने संबोधन के दौरान बिहार की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक विरासत को न केवल देश, बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि यह भूमि सिर्फ इतिहास रचने वाली नहीं है, बल्कि इसने बौद्ध, जैन और समाजवादी चिंतन को जन्म देकर शांति, करुणा और समानता का संदेश दिया है।
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राधाकृष्णन ने विशेष रूप से चंपारण का जिक्र करते हुए कहा कि यहीं की धरती ने महात्मा गांधी को एक सामान्य नेता से ‘महात्मा’ में बदल दिया। चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का वह ऐतिहासिक अध्याय बना, जिसने आजादी की लड़ाई को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की।
Motihari Convocation: बिहार की भूमि ने दिया मानवता को संदेश
भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति इसी पावन भूमि पर हुई, जिसने दुनिया को शांति और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय को भी याद किया, जो प्राचीन काल में वैश्विक शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र था। आज उस गौरवशाली परंपरा को फिर से जीवित करने के प्रयास जारी हैं।
भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और शिक्षा का योगदान
उपराष्ट्रपति ने भारत की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश आज विश्व के सबसे स्थिर और तेजी से विकसित होते राष्ट्रों में से एक है। उन्होंने बताया कि भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और निकट भविष्य में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। इस प्रगति के मुख्य स्तंभों में शिक्षा, नवाचार और तकनीक शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रभावी ढंग से लागू किया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था अधिक आधुनिक और रोजगारोन्मुख बन रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसे क्षेत्र भारत में नवाचार, स्टार्टअप और शोध के नए अवसर खोल रहे हैं, जो आने वाले समय में देश के विकास को नई गति देंगे।
छात्रों को उपराष्ट्रपति का राष्ट्र निर्माण का संदेश
डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि का क्षण नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए करें।
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इस कार्यक्रम में हरिवंश नारायण सिंह, सैयद अता हसनैन, सतीश चंद्र दुबे, सम्राट चौधरी और सुनील कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के छात्रों को इस अवसर पर डिग्रियां प्रदान की गईं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/







