
जाली नोट तस्कर: बिहार के मोतिहारी में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है! पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाली करेंसी का कारोबार करने वाले कुख्यात तस्कर सुशील तिवारी उर्फ दया तिवारी को धर दबोचा है। भारत-नेपाल सीमा पर हुई यह गिरफ्तारी एक बड़े नेटवर्क के भंडाफोड़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मिलिट्री इंटेलिजेंस लखनऊ से मिली गुप्त सूचना के आधार पर, एसटीएफ और हरैया थाना पुलिस ने मिलकर यह बड़ी कार्रवाई की। सर्विलांस और खुफिया इनपुट के जरिए सुशील तिवारी को भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, सुशील तिवारी जाली नोट तस्करी गिरोह का मुख्य सरगना है, जिसका नेटवर्क भारत, नेपाल और बांग्लादेश तक फैला हुआ है। पिछले पांच-छह महीनों से वह फरार चल रहा था और कई एजेंसियां उसकी तलाश में थीं। उसकी गिरफ्तारी को जाली नोट तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
जाली नोट तस्कर सुशील तिवारी का अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क
सुशील तिवारी की गिरफ्तारी का मामला 31 जनवरी को हरैया थाना में दर्ज एक केस से जुड़ा है। उस समय पुलिस ने एक नेपाली नागरिक सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से करीब 25 लाख रुपए की नेपाली जाली मुद्रा और 18,500 रुपए की भारतीय जाली करेंसी बरामद की गई थी। इसके अलावा, मौके से कई अन्य संदिग्ध वस्तुएं भी मिली थीं:
- एक दर्जन मोबाइल फोन
- पासपोर्ट
- मोटरसाइकिल
- जाली नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायन
- जाली नोट बनाने वाले उपकरण
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस कार्रवाई के बाद से ही सुशील तिवारी फरार चल रहा था।
खुलासे और नकली नोट कारोबार पर चोट
गिरफ्तारी के बाद सुशील तिवारी ने पूछताछ में नकली नोट कारोबार से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। उसने अपने नेटवर्क और अन्य सहयोगियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है, जिसके आधार पर जांच एजेंसियां अब आगे की कार्रवाई में जुट गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि उसकी निशानदेही पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की भी प्रबल संभावना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मोतिहारी के एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि दया तिवारी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस के साथ-साथ कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां लगातार काम कर रही थीं। मिलिट्री इंटेलिजेंस और एसटीएफ के सहयोग से आखिरकार उसे पकड़ लिया गया। एसपी ने कहा कि आरोपी को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जाएगी, ताकि इस अंतर्राष्ट्रीय गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और नेटवर्क का पूरी तरह खुलासा किया जा सके।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से नकली नोट कारोबार के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और गिरोह की कमर टूट गई है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होंगे और कई अन्य तस्करों की गिरफ्तारी भी संभव हो सकेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।







