

National Herald Case: कानून की पेचीदगियां और सियासत की बिसात पर बिछी चालें, जब एक साथ उलझती हैं तो न्याय की लड़ाई और दिलचस्प हो जाती है। नेशनल हेराल्ड मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां गांधी परिवार और ईडी आमने-सामने हैं।
National Herald Case: गांधी परिवार को राहत या नई चुनौती? दिल्ली HC ने ED अपील पर सुनवाई की तारीख बढ़ाई
नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की अपील, गांधी परिवार को मिला वक्त
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नेशनल हेराल्ड मामले में दायर अपील पर सुनवाई के लिए 9 मार्च की तारीख तय कर दी। गांधी परिवार और अन्य पक्षों ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई की।
गांधी परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा और सुझाव दिया कि मामले की सुनवाई 9 मार्च को की जाए। न्यायालय ने इस अनुरोध को ध्यान में रखते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रतिवादी के रूप में नामित फर्मों में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद दुबे ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा और बताया कि उनके मुवक्किल को अपील की सूचना बहुत देर से मिली थी।
प्रवर्तन निदेशालय ने न्यायालय को सूचित किया कि उसने तामील का हलफनामा पहले ही दाखिल कर दिया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, पीठ ने मामले को आगे की कार्यवाही के लिए 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया। नेशनल हेराल्ड मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार करने वाले राउज़ एवेन्यू न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए ईडी ने यह अपील दायर की है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
प्रतिवादियों में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ-साथ अन्य लोग भी शामिल हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ईडी का तर्क है कि अनुसूचित अपराध में एफआईआर के अभाव में पीएमएलए के तहत कार्यवाही जारी नहीं रखी जा सकती, यह मानने में निचली अदालत की गलती है। यह मामला एक जटिल कानूनी लड़ाई का हिस्सा है जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय की भूमिका अहम है।
कानूनी दांवपेच और ईडी का तर्क
ईडी का तर्क है कि जहां निजी शिकायत पर पहले ही संज्ञान लिया जा चुका है, वहां कानून में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है कि एफआईआर के बिना पीएमएलए की कार्यवाही जारी न रखी जा सके। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, आगामी सुनवाई में कई महत्वपूर्ण कानूनी बिंदुओं पर बहस होने की संभावना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





