Gig Workers Strike: नए साल की पूर्व संध्या पर गिग वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल की घोषणा ने लाखों उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया था कि क्या 10 मिनट की डिलीवरी जैसी सेवाएं सामान्य रह पाएंगी या नहीं। हालांकि, बेहतर कार्य स्थितियों और अधिक वेतन की मांग को लेकर जारी इस आंदोलन के बावजूद, फूड डिलीवरी दिग्गज Zomato और Swiggy ने रिकॉर्ड-तोड़ ऑर्डर पूरे कर सबको चौंका दिया।
नए साल की पूर्व संध्या पर Gig Workers Strike का असर नहीं, Zomato-Swiggy ने तोड़े रिकॉर्ड
नए साल की पूर्व संध्या पर गिग वर्कर्स की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की आशंका ने उपभोक्ताओं में चिंता जरूर पैदा की थी कि क्या त्वरित डिलीवरी सेवाएं बाधित होंगी। हालांकि, लाखों की उम्मीदों को धता बताते हुए, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato और Swiggy ने रिकॉर्ड संख्या में ऑर्डर डिलीवर किए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि हड़ताल का इनके कारोबार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। यह घटनाक्रम देश में तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स मॉडल की मजबूती को भी दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
एक ओर जहां Zomato और इसकी क्विक-कॉमर्स इकाई Blinkit के लिए यह एक बड़ी जीत साबित हुई, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर यह बहस फिर से तेज हो गई कि क्या 10 मिनट की डिलीवरी का मॉडल डिलीवरी पार्टनर्स पर अनावश्यक दबाव डालता है। इस मॉडल की नैतिकता और व्यावहारिकता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
Gig Workers Strike का नहीं हुआ कारोबार पर असर: Zomato CEO ने समझाया 10-मिनट डिलीवरी का गणित
इस पूरे विवाद के बीच, Zomato के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 मिनट की डिलीवरी के दौरान राइडर्स की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाता। गोयल के अनुसार, इस मॉडल को लेकर हो रही आलोचना का बड़ा कारण सिस्टम के डिजाइन को लेकर लोगों में पूरी समझ का अभाव है। उन्होंने बताया कि यह सुविधा ग्राहकों के घर के पास स्थित डार्क स्टोर्स की वजह से संभव हो पाती है, न कि राइडर्स की तेज गति से।
गोयल ने 10 मिनट की डिलीवरी के काम करने के तरीके को विस्तार से समझाते हुए कहा कि तेज डिलीवरी का दारोमदार राइडर्स की रफ्तार पर नहीं, बल्कि मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होता है। उनके मुताबिक, डिलीवरी पार्टनर्स से तेज वाहन चलाने की कोई अपेक्षा नहीं की जाती है। प्रक्रिया के तहत, Blinkit पर ऑर्डर मिलने के बाद महज ढाई मिनट में पिकिंग और पैकिंग पूरी कर ली जाती है, जबकि शेष समय में लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय की जाती है। यह दूरी औसतन करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटे की सुरक्षित गति के बराबर है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Zomato और Blinkit की रणनीति: सुरक्षा और दक्षता का संतुलन
Blinkit के डार्क स्टोर मॉडल को डिलीवरी की गति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देखा जा रहा है। ये स्टोर शहरी इलाकों में रणनीतिक रूप से स्थित होते हैं ताकि ग्राहकों तक पहुंचने में लगने वाला समय कम हो सके। यह मॉडल न केवल डिलीवरी को तेज करता है बल्कि डिलीवरी पार्टनर्स पर कम दूरी तय करने का दबाव भी सुनिश्चित करता है, जिससे उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होता। गोयल के स्पष्टीकरण से यह बात सामने आती है कि तेज डिलीवरी का मतलब जल्दबाजी में वाहन चलाना नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित सप्लाई चेन और भौगोलिक लाभ का उपयोग करना है।
यह घटना दर्शाती है कि Gig Workers Strike जैसी चुनौतियों के बावजूद, भारत में क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेक्टर अपनी लचीलेपन और तकनीकी नवाचार के दम पर आगे बढ़ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, गिग वर्कर्स के लिए बेहतर कार्य स्थितियों और न्यायसंगत वेतन की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इन कंपनियों को दीर्घकालिक सफलता के लिए इन चिंताओं को संबोधित करना होगा।




