
बिहार की राजनीति: समय का पहिया कभी रुकता नहीं, न राजनीति की चाल। बिहार की माटी से उठकर दिल्ली की दहलीज तक पहुंचने का यह सफर, दशकों के अनुभव और आकांक्षाओं का संगम है।
बिहार की राजनीति: नीतीश कुमार ने भरा राज्यसभा का पर्चा, क्या बदल जाएगी बिहार की दिशा?
बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन नबीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बिहार विधानसभा पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने कागजात जमा किए। कुमार, जो वर्ष 2005 से अब तक रिकॉर्ड दस बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, ने इस कदम के साथ राज्य की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बिहार की जनता के प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त करते हुए लिखा, “दो दशकों से अधिक समय तक आपने मुझ पर लगातार भरोसा और समर्थन जताया है। उसी विश्वास की ताकत से हमने बिहार और आप सभी की पूरी समर्पण भावना से सेवा की है। आपके भरोसे और समर्थन के कारण ही आज बिहार विकास और सम्मान की एक नई पहचान प्रस्तुत कर रहा है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
संसदीय जीवन की पुरानी आकांक्षा
नीतीश कुमार ने अपनी पोस्ट में यह भी साझा किया कि उनके संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी यह इच्छा रही है कि वे राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य बनें। उन्होंने कहा, “इसी आकांक्षा के अनुरूप मैं इस बार होने वाले राज्यसभा चुनाव में सदस्य बनने का प्रयास कर रहा हूं।”
उन्होंने बिहार की जनता को पूरे विश्वास के साथ आश्वस्त किया कि भविष्य में भी उनका जनता से संबंध बना रहेगा और विकसित बिहार के निर्माण के लिए उनके साथ मिलकर काम करने का उनका संकल्प अटल रहेगा। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।
पिछले वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को मिली प्रचंड जीत के बाद ऐसी अटकलें तेज हैं कि कुमार के पद छोड़ने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई नेता राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह पहली बार होगा कि बिहार को कोई भाजपा मुख्यमंत्री मिलेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। हिंदी भाषी राज्यों में बिहार ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां अब तक भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं रहा है। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि बृहस्पतिवार है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







