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फ़रवरी, 14, 2026
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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति Pervez Musharraf का निधन….कारगिल युद्ध…पाक अदालत से देशद्रोह में भगोड़ा…

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दुबई के एक अस्पताल में रविवार को पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का 79 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से अमाइलॉइडोसिस बीमारी से पीड़ित थे। पाकिस्तान की अदालत ने देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे परवेज मुशर्रफ को भगोड़ा घोषित किया था, जिसके बाद वे दुबई चले गए थे।

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रिपोर्ट्स में मुशर्रफ के परिजनों के हवाले कहा गया है कि उन्होंने एमाइलॉयडोसिस के कारण आज दम तोड़ दिया। उन्हें कुछ हफ्तों के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

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पिछले साल, 10 जून को उनके परिवार ने ट्विटर पर एक बयान जारी किया था। परिवार ने कहा था कि पूर्व सेना प्रमुख उस स्थिति में हैं जहां उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है और रिकवरी नहीं हो सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि वो वेंटिलेटर पर नहीं हैं। परिवार ने लोगों से प्रार्थना करने की अपील की थी।

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जानकारी के अनुसार, साल 1999 में सफल सैन्य तख्तापलट के बाद परवेज मुशर्रफ दक्षिण एशियाई राष्ट्र (पाकिस्तान) के दसवें राष्ट्रपति थे। उन्होंने 1998 से 2001 तक 10वें CJCSC और 1998 से 2007 तक 7वें शीर्ष जनरल के रूप में कार्य किया।1961 में 18 साल की उम्र में मुशर्रफ ने काकुल में पाकिस्तान सैन्य अकादमी में प्रवेश किया। पढ़िए पूरी खबर

परवेज मुशर्रफ 20 जून, 2001 से 18 अगस्त, 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे। मुशर्रफ के कार्यकाल में ही कारगिल घुसपैठ हुई थी और फिर भारत ने पाकिस्तानी सेना को खदेड़ कर कारगिल समेत कई क्षेत्रों पर फिर से कब्जा कर लिया था। मई, 2016 में पाकिस्तान की अदालत ने देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे परवेज मुशर्रफ को भगोड़ा घोषित किया था, जिसके बाद वे दुबई चले गए थे।

जानकारी के मुताबिक मुशर्रफ कई महीने से अस्पताल में भर्ती थे। उनके परिवार ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए कहा था कि वे अमाइलॉइडोसिस नाम की बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसके चलते उनके सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया है। इस बीमारी में इंसान के शरीर में अमाइलॉइड नाम का असामान्य प्रोटीन बनने लगता है। यह दिल, किडनी, लिवर, तंत्रिका तंत्र, दिमाग आदि अंगों में जमा होने लगता है, जिसकी वजह से इन अंगों के ऊतक (टिश्यू) ठीक से काम नहीं कर पाते। मुशर्रफ के परिवार ने 8 महीने पहले मुशर्रफ की एक तस्वीर भी जारी की थी, तब वे दुबई के अस्पताल में भर्ती थे।

मुशर्रफ ने सेना में बतौर जूनियर अफसर शुरुआत की थी। उन्होंने 1965 के युद्ध में भारत के खिलाफ लड़ाई लड़ी। ये युद्ध पाकिस्तान हार गया था। इसके बावजूद पाक सरकार की ओर से बहादुरी से लड़ने के लिए मुशर्रफ को पदक से सम्मानित किया गया था। सरकार ने उन्हें कई बार प्रमोट भी किया। 1998 में परवेज मुशर्रफ जनरल बने। उन्होंने भारत के खिलाफ कारगिल की साजिश रची, लेकिन बुरी तरह से असफल रहे। अपनी जीवनी ‘इन द लाइन ऑफ फायर-ए मेमॉयर’ में जनरल मुशर्रफ ने लिखा कि उन्होंने कारगिल पर कब्जा करने की कसम खाई थी, लेकिन नवाज शरीफ की वजह से वो ऐसा नहीं कर पाए।

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तत्कालीन पाक पीएम नवाज शरीफ ने 1998 में परवेज मुशर्रफ पर भरोसा करके उन्हें पाकिस्तानी सेना का प्रमुख बनाया। एक साल बाद ही 1999 में जनरल मुशर्रफ ने नवाज शरीफ का तख्तापलट कर दिया और पाकिस्तान के तानाशाह बन गए। उनके सत्ता संभालते ही नवाज शरीफ को परिवार समेत पाकिस्तान छोड़ना पड़ा था। सत्ता में रहते हुए जनरल मुशर्रफ ने बलूचिस्तान में आजादी की मांग करने वालों के साथ काफी बुरा सुलूक किया। सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी गई। यही कारण है कि सत्ता जाने के बाद में बलूच महिलाओं ने अमेरिका से जनरल मुशर्रफ को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की मांग की थी।

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आजादी से पहले दिल्ली से नाता

परवेज मुशर्रफ का परिवार बंटवारे से पहले भारत में काफी संपन्न था। उनके दादा टैक्स कलेक्टर थे। उनके पिता भी ब्रिटिश हुकूमत में बड़े अफसर थे। मुशर्रफ की मां बेगम जरीन 1940 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ती थीं। मुशर्रफ परिवार के पास पुरानी दिल्ली में एक बड़ी कोठी थी। अपने जन्म के चार साल बाद तक मुशर्रफ ज्यादातर यहीं रहे। 2005 में अपनी भारत यात्रा के दौरान परवेज मुशर्रफ की मां बेगम जरीन मुशर्रफ लखनऊ, दिल्ली और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी गई थीं।

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