

बिहार में के बड़ी किसान रैली की भी तैयारी चल रही है। किसान नेता राकेश टिकैत शनिवार को पटना पहुंचे और मीडिया से बातचीत की। उनके साथ आरजेडी विधायक और पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह भी मौजूद थे। हालांकि, टिकैत ने आते ही कहा, वह सीएम नीतीश और लालू प्रसाद से भी मिलेंगे अगर मौका लगा तो…मगर यहां बिहार की राजनीति तो धान, गेंहू, मक्का पर आ गई है…
यह संकेत बिहार में बड़े राजनीतिक समीकरण के संकेत भर नहीं हैं, बल्कि बिहार सरकार की जल्द आने वाला चौथा कृषि रोड मैप से पहले की पृष्ठभूमि है। कारण, आते ही टिकैत किसानी की हक-हकूक की बात उठाकर नया समीकरण खड़ा कर दिया है। खासकर, बाजार समिति की फिर से बहाली एक नया मुद्दा कारगर साबित होगा।
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अभी से तेज हो गई है। सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुट गई हैं। बिहार में इसका असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा है।
राकेश टिकैत ने कहा कि यहां का एग्रीकल्चर सेक्टर पूरी तरह खत्म हो चुका है। बिहार के किसानों को बचाना है तो सबसे पहले बाजार समिति को बहाल करना होगा। हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों को विनाश करके विकास नहीं हो सकता है।
इसके लिए आंदोलन करना होगा नहीं तो किसानों की जमीन बेवजह लूटती जाएगी। अब बिहार में जल्द आंदोलन होगा। वहीं, जातीय गणना के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य जाति गणना नहीं है। हमारा उद्देश्य खेतों में काम करने वालों के लिए है। फसलों के लिए उचित दरें प्रदान की जानी चाहिए। क्या कोई व्यापारी किसी जाति विशेष के किसान को अधिक भुगतान करता है?
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का बिहार आना जाना लगा हुआ है। खासकर गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का। वही महागठबंधन भी दुर्गा पूजा के बाद चुनावी मैदान में कूदने की तैयारी है। इनसब के बीच बिहार में के बड़ी किसान रैली की भी तैयारी चल रही है।
सबसे बड़े सिरदर्द सुधाकर सिंह बिहार सरकार के बने हुए हैं। राकेश टिकैत के रैली की जानकारी को लेकर एक पोस्टर सुधारक सिंह ने सोशाल मीडिया पर पोस्ट किया है।साथ ही उन्होंने लिखा कि “सभी किसान भाईयों से आग्रह है कि किसानों की इस बहुमूल्य लड़ाई में अपना बहुमूल्य योगदान दें।
सुधाकर सिंह कहते हैं कि किसानों से जुड़ा सवाल वे पहले भी उठाते रहे हैं। बिहार में मंडी कानून लागू करने, जमीन के सवाल और अनाज का उचित मूल्य दिए जाने के सवाल पर राकेश टिकैत आ रहे हैं। यह सवाल न तो सत्ता पक्ष, न विपक्ष, न राजनीतिक का है, यह सवाल किसानों के जीवन-मरण का सवाल है।
जानकारी मिली है कि बिहार सरकार जल्द ही चौथा कृषि रोड मैप लाने वाली है। बताया जा रहा है कि इसका उद्घाटन 18 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू करेंगी। इसे पहले 7 अक्टूबर यानि आज को राजद के विधायक और पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह के क्षेत्र रामगढ़ के सिसौढ़ा और रोहतास के मलिया बाग में किसान नेता राकेश टिकैत की बड़ी रैली होने वाली है।
वो यहां किसानों की बड़ी रैली को संबोधित करेंगे। 8 को कैमूर के भभुआ में उनका कार्यक्रम है। मसोई में टिकैत किसानों की बैठक को संबोधित करेंगे। इसके बाद 9 अक्टूबर को औरंगाबाद के गांधी मैदान में टिकैत की सभा है।
राकेश टिकैत के रैली की जानकारी खुद सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। राकेश टिकैत चौथा कृषि रोड मैप के विरोध में बयान दे सकते हैं। क्योंकि सुधाकर सिंह भी इसका विरोध करते रहे हैं।
राकेश टिकैत ने कहा कि बिहार से हजारों टन धान बाहर भेजा जाता है, उसे कौन लोग खरीद रहा है? वह कहां बेचा जाता है? यहां पर किसी को एमएसपी नहीं मिलती है। बिहार के किसानों की धान 800 से बाहर 1200 रुपये में खरीदा जाता है। राकेश टिकैत ने कहा कि एमएसपी एसपी गारंटी कानून देश में बनना चाहिए।
अभी 5000 करोड़ रुपये का पूरे देश में मक्का के किसानों का नुकसान हो रहा है। बिहार के किसान दिल्ली में मुंबई में जाकर लेबर का काम करते हैं। बिहार के लोगों को संघर्ष करना पड़ेगा और एक आंदोलन बिहार के किसानों को जरूर करना होगा। चौथे कृषि रोड मैप के बारे में राकेश टिकैत ने कहा कि किस मद में कितना पैसा लगा है? किसानों के लिए यह सरकार को बतानी होगी।
वहीं, सुधाकर सिंह ने कृषि रोड मैप को लेकर नीतीश कुमार को अपने निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को पहले किसानों से किए हुए पुराने वादों को पूरा करना चाहिए।चौथे कृषि रोड मैप को लेकर सुधाकर सिंह ने कहा कि अखबारों के जरीए यह जानकारी मिली कि 18 अक्टूबर को बिहार का चौथा कृषि रोड मैप सरकार लाने जा रही है।
कृषि रोड मैप आने के बाद उसे अध्ययन करेंगे और तब बताएंगे कि उससे बिहार के किसानों को क्या लाभ होने वाला है। किसानों से जुड़ी समस्या को लेकर जो मांगे थीं वह चौथे कृषि रोड मैप में शामिल है या नहीं, इसको भी देखेंगे।
सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार सरकार जब दूसरा कृषि रोड मैप लाई थी उस वक्त कहा गया था कि बिहार में मंडी कानून लाया जाएगा लेकिन सरकार अब चौथा कृषि रोड मैप लाने जा रही है लेकिन आजतक मंडी कानून लागू नहीं हो सका।
बिहार में धान, गेंहू और मक्का की खरीद नहीं हो पा रही है। बिहार में जमीन के उपयोग को लेकर सरकार से अपेक्षा थी कि वह इसको लेकर नीति लाएगी लेकिन आजतक जमीन के उपयोग को लेकर नीति सरकार नहीं बना सकी।


