
Energy Security India: जैसे समंदर में तूफान उठने पर हर कश्ती डगमगाने लगती है, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में हलचल से हर देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने और वैश्विक मंच पर भारत की छवि को धूमिल करने की आदत होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की यह आदत बन गई है कि वे देश में भ्रम फैलाते हैं और विदेश नीति पर सवाल उठाते हैं। मकर द्वार पर चाय पीते हुए भी उन्होंने कोविड के दौरान देश में भ्रम फैलाया था, और अब ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं।
देश की `Energy Security India` और राहुल गांधी के सवाल
उनकी ये टिप्पणियाँ केंद्र और विपक्ष के बीच राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चल रही तीखी बहस के बीच आई हैं, जिसे पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति पर इसके प्रभाव ने और हवा दी है। एक दिन पहले, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा था कि `मध्य पूर्व संघर्ष` और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, और कहा था कि दर्द तो अभी शुरू हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
लोकसभा में बोलते हुए गांधी ने कहा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के वैश्विक और घरेलू स्तर पर दूरगामी परिणाम होने की संभावना है। गांधी ने चेतावनी दी कि इसका असर देश भर में महसूस होना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि रेस्तरां बंद हो रहे हैं और एलपीजी की उपलब्धता को लेकर लोगों में दहशत बढ़ रही है।
उन्होंने कहा, “मध्य पूर्व में युद्ध छिड़ गया है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान आपस में लड़ रहे हैं। इस युद्ध के दूरगामी परिणाम होंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे वैश्विक तेल का 20% प्रवाह होता है, बंद कर दिया गया है। इसके बहुत गंभीर परिणाम होंगे, खासकर हमारे लिए, क्योंकि हमारे तेल और प्राकृतिक गैस का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। अभी तो बस शुरुआत हुई है। रेस्तरां बंद हो रहे हैं। एलपीजी को लेकर व्यापक दहशत फैली हुई है… यह तो बस शुरुआत है।”
गांधी ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी राष्ट्र की स्थिरता की नींव होती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। उन्होंने भारत की ऊर्जा साझेदारी संबंधी निर्णयों को बाहरी शक्तियों के प्रभाव में लेने के विचार की आलोचना की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सरकार का रुख और आगे की चुनौतियाँ
इन गंभीर चुनौतियों के बीच, सरकार ने लगातार देश को आश्वस्त किया है कि भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार हैं और कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में, ऊर्जा नीति पर एक संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर अनावश्यक बोझ न पड़े। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




