
राजनीति के अखाड़े में शब्दबाणों की जंग अक्सर देखने को मिलती है, लेकिन कभी-कभी ये वार इतने तीखे होते हैं कि पूरी बहस का रुख ही मोड़ देते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब एक तीखी नोकझोंक ने संसद के गलियारों में हलचल मचा दी। Rahul Gandhi Ravneet Bittu Row: कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई तीखी बहस ने राजनीतिक गलियारों में गरमाहट ला दी है, जहां एक को ‘गद्दार’ तो दूसरे को ‘देश का दुश्मन’ बताया गया। रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ‘गद्दार’ वाली टिप्पणी पर तीखी आलोचना की और कांग्रेस पार्टी को परिवारवाद करार दिया। संसद के बाहर राहुल गांधी और भाजपा नेता के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें लोकसभा के विपक्ष के नेता ने बिट्टू को ‘गद्दार’ कहा। केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस नेता को जवाब देते हुए उन्हें ‘देश के दुश्मन’ तक कह दिया। संयोग से, बिट्टू, जो पहले कांग्रेस में थे, 2024 में भाजपा में शामिल हो गए थे।
Rahul Gandhi Ravneet Bittu Row: संसद में ‘गद्दार’ कौन, ‘देश का दुश्मन’ कौन?
इस पूरे घटनाक्रम पर एएनआई से बात करते हुए रवनीत बिट्टू ने अपनी पुरानी पार्टी छोड़ने की वजह बताई। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी इसलिए छोड़ी क्योंकि वह अब ‘असली कांग्रेस’ नहीं रह गई थी। केंद्रीय राज्य मंत्री ने दावा किया, ‘जब हम कांग्रेस में थे, तब हम पार्टी के लिए सीटें जीत रहे थे। हम कभी भी उन पर बोझ नहीं थे।’ उन्होंने आगे कहा कि जब यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी पूरी तरह से परिवारवाद की राजनीति का गढ़ बन गई है और अब वह कांग्रेस पार्टी नहीं रही जो कभी थी, तो लोग उसे छोड़ने लगे। अगर यह असली कांग्रेस होती, तो लोग बने रहते। मैंने तो यह भी कहा था कि अगर यह असली कांग्रेस होती, तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी खुद मेज पर चढ़कर सदन से निलंबित हो जाते। यह टिप्पणी मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर एक बड़ा बयान थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सिख समुदाय का अपमान या संसदीय मर्यादा का उल्लंघन?
इसी बीच, भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को सिख समुदाय का अपमान बताया। पाल ने तीखे शब्दों में कहा, ‘सिख समुदाय का निश्चित रूप से अपमान हुआ है। राहुल गांधी जो बयान दे रहे हैं, क्या वे सचमुच देश के दुश्मन नहीं हैं? वे संसद और लोकतांत्रिक मूल्यों के दुश्मन हैं।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि शायद यह पहली बार है कि राहुल गांधी के एक मुद्दे पर अड़े रहने के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चार दिन की चर्चा पूरी तरह से धरी की धरी रह गई। पाल की ये टिप्पणियां राहुल गांधी पर लगातार हमले का हिस्सा हैं और संसदीय मर्यादा के उल्लंघन का मुद्दा उठाती हैं।
पूरा वाकया बुधवार को तब शुरू हुआ जब बिट्टू वहां से गुजर रहे थे। गांधी ने उन्हें देखकर कहा, ‘देखो, एक गद्दार यहीं से गुजर रहा है। इसका चेहरा देखो।’ कांग्रेस नेता ने उनसे हाथ मिलाने की पेशकश करते हुए तंज कसा, ‘नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम (कांग्रेस में) वापस आओगे।’ केंद्रीय राज्य मंत्री ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और राहुल को ‘देश के दुश्मन’ कहकर संबोधित किया। यह जुबानी जंग तब और तेज हो गई जब रवनीत बिट्टू ने विरोध कर रहे सांसदों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे ऐसे बैठे हैं जैसे उन्होंने कोई युद्ध जीत लिया हो। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/ यह घटना दर्शाती है कि भारतीय राजनीति में व्यक्तिगत हमलों का स्तर किस हद तक बढ़ गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

