



Parliament Session: संसद का सत्र, राजनीति के अखाड़े में जब पक्ष-विपक्ष की तलवारें खिंचती हैं, तो कभी-कभी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी भेंट चढ़ जाते हैं। ऐसी ही तस्वीर इस बार लोकसभा में देखने को मिली, जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार और अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार और लोकसभा अध्यक्ष पर संसद चलाने में कोई दिलचस्पी न होने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लोकसभा में बार-बार हो रहे व्यवधानों के कारण उन्हें केंद्रीय बजट 2026-27 पर अपनी बात रखने का अवसर ही नहीं मिला। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सदन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए, थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि वे बजट पर चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेने की पूरी तैयारी के साथ आए थे, लेकिन उन्हें ऐसा करने का कोई अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार और लोकसभा अध्यक्ष दोनों ही सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में रुचि नहीं रखते हैं।
Parliament Session: आखिर क्यों नहीं चल पा रहा संसद सत्र?
थरूर ने आगे कहा कि वे उसी दिन बाद में एक बार फिर सदन में बोलने का प्रयास करने के लिए लौटेंगे। कांग्रेस सांसद ने कार्यवाही के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अनुपस्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया, जिससे यह संकेत मिलता है कि संभवतः सदन के स्थगन की आशंका पहले से ही थी। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री सदन में बैठी ही नहीं थीं और आगे जोड़ा, “मुझे लगता है कि उन्हें पहले से ही पता था कि सदन स्थगित होगा।” संसद के दोनों सदनों में सोमवार को केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा जारी रहने का कार्यक्रम था, जिसे वित्त मंत्री सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किया था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सुगबुगाहट
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर, शशि थरूर ने कहा कि यह निर्णय उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने कहा, “यह मेरे हाथ में नहीं है; आप इस बारे में हाई कमांड से पूछ सकते हैं।” एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय कार्यवाही को लेकर जारी गतिरोध के बीच, विपक्षी सांसद बजट सत्र के दूसरे भाग में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं। यह एक गंभीर राजनीतिक घटनाक्रम है जो संसद के भीतर की खींचतान को दर्शाता है। इस प्रकार की राजनीतिक उठापटक से जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दे अक्सर पीछे छूट जाते हैं।





