

सीतामढ़ी न्यूज़: जब जिले का सबसे बड़ा अधिकारी खुद ही मैदान में उतर जाए, हाथ में झाड़ू थाम ले और जनभागीदारी का आह्वान करे, तो समझ लीजिए कि बात सिर्फ सफाई की नहीं, एक बड़े बदलाव की है। सीतामढ़ी के डीएम ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है।
बिहार के सीतामढ़ी जिले में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जिलाधिकारी रिची पांडेय ने एक सफाई अभियान की शुरुआत करते हुए खुद अपने हाथों में झाड़ू थाम ली और नदी किनारे जमे कचरे को साफ करने में जुट गए। उनका यह कदम सिर्फ एक प्रतीकात्मक कार्य नहीं था, बल्कि यह एक स्पष्ट संदेश था कि नदियों और तालाबों को बचाना सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
डीएम की अनूठी पहल
डीएम रिची पांडेय ने सीतामढ़ी में जलस्रोतों के संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस अनोखे मिशन की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य नदियों और तालाबों के किनारों को साफ-सुथरा रखना और उनमें कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना है। जिलाधिकारी के इस अप्रत्याशित कदम ने स्थानीय लोगों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को भी प्रेरित किया है। अक्सर, ऐसे अभियानों में अधिकारी केवल दिशा-निर्देश देते हैं, लेकिन जब शीर्ष अधिकारी खुद ही अग्रिम पंक्ति में आकर काम करते हैं, तो उसका प्रभाव कहीं अधिक गहरा होता है।
जनभागीदारी का आह्वान
जिलाधिकारी पांडेय का मानना है कि जिले में जलस्रोतों की स्वच्छता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब इसमें आम जनता की सक्रिय भागीदारी हो। उन्होंने इस पहल के माध्यम से नागरिकों को यह संदेश दिया है कि अपने आसपास के वातावरण और प्राकृतिक संसाधनों की देखभाल करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। इस अभियान में स्थानीय स्वयंसेवकों और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि यह एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले सके। यह पहल सिर्फ गंदगी हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
नदियां और तालाब किसी भी क्षेत्र की जीवनरेखा होते हैं। उनका प्रदूषित होना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। सीतामढ़ी डीएम की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक और अनुकरणीय कदम है। यह अन्य जिलों के अधिकारियों और आम नागरिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जलस्रोतों को बचाने और स्वच्छ रखने के लिए इसी तरह के प्रयास करें। यह दिखाता है कि एक छोटा सा कदम भी बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकता है, बशर्ते उसे सही दिशा और दृढ़ संकल्प के साथ उठाया जाए।


