
बिहार के अधिकांश शहर बारिश होते ही पानी में डूब जाते हैं। हालात यह रहती है कि बारिश में घरों से निकलना मुसीबत बन जाता है। जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था अब तक अधिकांश शहरों में समस्या के विकराल रूप में सामने है। ऐसे में सरकार ने अब जल निकासी के स्थायी समाधान पर पूरी तरह से फोकस करना शुरू कर दिया है। वहीं, सरकार ने पैंतीस शहरों में मोक्षधाम बनाने की बात भी कही है।
जानकारी के अनुसार, इसके अलावा शहरों को स्वच्छ रखने वाली योजनाओं पर सरकार ने खुलकर खर्च करने की योजना बनाई है। स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम बनाकर शहरों का जलजमाव दूर किया जाना है। बरसात के पानी को निकालने के लिए अलग से व्यवस्था की जानी है।
इसके लिए सभी शहरों में स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसके लिए बजट में वित्तीय वर्ष 2023-24 में 276 करोड़ रुपए दिए गए हैं।
पटना, खगौल, दानापुर और फुलवारी में जलनिकासी के लिए नौ कैचमेंट एरिया बनाए जा रहे हैं। इसके लिए करीब एक हजार करोड़ की स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है। राज्य के अन्य नगर निगमों में भी प्राथमिकता के आधार पर इस काम को कराया जाना है।
इसके बाद अन्य निकायों में भी योजना के अनुसार जलनिकासी के उपाय किए जाएंगे। सहरसा, सासाराम, मधुबनी, सुपौल, छपरा, कटिहार एवं दरभंगा में योजना प्रस्तावित है। इसके अलावा 42 नगर निकायों में आउटफॉल ड्रेन की योजना है।
राज्य के शहरों को स्वच्छ रखने के लिए भी बजट में कई प्रावधान किए गए हैं। राज्य के छह निकाय मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ, मुंगेर, राजगीर, बोधगया, सुपौल को मॉडल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के मानक के रूप में विकसित किया जा रहा है। 35 नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट के गीले एवं सूखे कचरे को प्रसंस्करण के लिए अलग किया जा रहा है।
मोक्षधाम योजना के तहत पहले चरण में जिला मुख्यालयों में शवदाहगृह का निर्माण कराया जाना है। अभी 35 जिला मुख्यालयों और नदी घाटों के किनारे योजना की स्वीकृति दी गई है।






