
संजय कुमार राय, दरभंगा देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। सिंहवाड़ा थाना में हाल में हुई प्राथमिकी के मामले में एएनएम अनीता कुमारी और उनके पति अरुण कुमार पर कार्रवाई होना तो तय ही है। लेकिन, विकलांगिता प्रमाण पत्र देने में संलिप्त चिकित्सकों पर भी कार्रवाई होना तय माना जा रहा हैं।
सबसे अहम पहलू बार-बार सामने आता हैं कि कैसे चार-चार प्रमाण पत्र इन पदाधिकारियों की ओर से निर्गत कर दिये गये? इस सवाल के उत्तर को ढूंढने का प्रयास किया तो कई राज खुलकर सामने आये हैं।
सूत्र बताते हैं कि एएनएम अनीता कुमारी के पति वर्ष 2005 से ही सिंहवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र में अनाधिकृत रूप से कार्यों को अंजाम दे रहे थे। सूत्रों का कहना हैं कि वर्ष 2018 तक यानि तेरह वर्षों तक उक्त केन्द्र में कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, सरकारी भरपाई पंजी, रोकड़ पंजी आदि देख रहे थे।
इसका पुख्ता प्रमाण संधारित अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध हैं। मामला उस वक्त से बिगड़ने लगा, जब 2019 में स्वास्थयकर्मी सुशील चंद्र मिश्रा की पोस्टिंग हुई। श्री मिश्रा ने स्वास्थ्य केंद्र पर स्थापना का प्रभार लिया।
पद भार के बाद एएनएम के पति अरुण कुमार के बारे में उन्हें जब पता चला तो श्री कुमार से काम लेना बंद कर दिया। यही नहीं, श्री मिश्रा ने चेतावनी दी कि आप अनाधिकृत रूप से काम करेंगे तो आपके विरुद्ध उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।
फिर क्या था। सिंहवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र में अफरातफरी का माहौल हो गया। बताया जा रहा है कि श्री कुमार की ओर से श्री मिश्रा के विरुद्ध आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलने लगा। और, गलत आरोप लगाकर फंसाने की तैयारी की गई।
मामला लोकायुक्त तक पहुंचा। लोकायुक्त ने इसकी जांच क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य प्रमंडल दरभंगा को दी गई। क्षेत्रीय अपर निदेशक ने जांच भी की। श्री मिश्रा ने कई अभिलेख उपलब्ध कराकर यह साबित कर दिया कि श्री कुमार अनाधिकृत रूप से यहां कार्य कर रहें हैं।
अब इस कार्यालय के लिपिक ने भी खेल कर दिया। क्षेत्रीय अपर निदेशक की ओर से लोकायुक्त को जो प्रतिवेदन यहां से भेजा गया उसमें अभिलेखों की प्रति नहीं भेजी गई, इस कारण कोई भी साक्ष्य अरुण कुमार के विरुद्ध लोकायुक्त कार्यालय नहीं पहुंचा।
कई ऐसे कारण हैं जो यह साबित करते हैं सिंहवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र में कई अनियमितताए हैं, जिसे परत दर परत खोलने की जरूरत हैं। इसी का प्रमाण यह भी है कि अलग-अलग समय में श्री कुमार को चिकित्सा प्रभारी विकलांगिता प्रमाण पत्र देते रहें। और, वह आयकर में छूट लेता रहा।
बताया जा रहा हैं कि कुछ साल पहले करीब 40 हजार और फिर 75 हजार की छूट इसी आधार पर ली हैं। यह मामला गंभीर हैं और अब पुलिस को तय करना हैं कि और भी कितने आरोपी इस प्राथमिकी के बन सकते हैं। पुलिस का अनुसंधान बिंदुवार जारी हैं।







