

Election Commission News: जब चुनावी रणभेरी बजती है, तो हर दांव-पेंच पर बारीक नज़र रखी जाती है। लेकिन इस बार आरोप खुद चुनाव की निगरानी करने वाली संस्था पर लग रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का खुला उल्लंघन कर रहा है। तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस संबंध में एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग औपचारिक, निगरानी योग्य और जवाबदेह माध्यमों के बजाय व्हाट्सएप के जरिए नियमित रूप से अपने अधिकारियों को निर्देश भेज रहा है। बनर्जी ने अपने पोस्ट में पूछा, “क्या चुनाव आयोग को लगता है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा सकता है? देश की सर्वोच्च अदालत ने बार-बार पारदर्शिता, उचित प्रक्रिया और संचार के आधिकारिक माध्यमों का पालन करने पर जोर दिया है। फिर भी हम देख रहे हैं कि निर्देश औपचारिक, पता लगाने योग्य और जवाबदेह तंत्रों के बजाय व्हाट्सएप के माध्यम से प्रसारित किए जा रहे हैं।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये आरोप चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता पर सवाल खड़े करते हैं।
Election Commission: व्हाट्सएप के जरिए निर्देश पर सवाल
बनर्जी ने आगे कहा कि ऐसी “विश्वसनीय रिपोर्टें” हैं कि निर्वाचन आयोग के अधिकारी, विशेष रूप से विशेष रोल ऑब्जर्वर सी. मुरुगन, अन्य अधिकारियों को जन्म प्रमाण पत्रों को वैध दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करने के निर्देश दे रहे हैं। उनका दावा है कि ऐसा मतदाता सूची से हटाए जाने वाले दस्तावेज़ों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से माइक्रो ऑब्जर्वरों को व्हाट्सएप समूह में सीधे निर्देश जारी करने का उल्लेख किया। यह एक ऐसा कदम है जो सुप्रीम कोर्ट के उस स्पष्ट निर्देश का उल्लंघन करता है कि माइक्रो ऑब्जर्वरों की भूमिका केवल सहायक होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया, “फिर वैधानिक प्रक्रिया को क्यों दरकिनार किया जा रहा है, और किसके निर्देशों पर?” यह गंभीर प्रश्न चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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जांच की मांग और डिजिटल डेटा के दुरुपयोग के आरोप
टीएमसी नेता ने व्हाट्सएप संदेशों के कथित स्क्रीनशॉट भी साझा किए, जिनमें अधिकारी कथित तौर पर दस्तावेज़ों की स्वीकार्यता के संबंध में निर्देश दे रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लॉगिन डेटा का दुरुपयोग क्वेरी उत्पन्न करने और दिल्ली में निर्वाचन आयोग के “राजनीतिक आकाओं” के निर्देश पर एक विशेष समुदाय को लक्षित करने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि इस मामले की स्वतंत्र रूप से जांच की जाए, तो यह स्थापित हो जाएगा। ये आरोप चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आमजन के विश्वास को चुनौती देते हैं। पूरी चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

