



Deworming Medicine Incident: जीवन की डोर जब उलझती है, तो कभी-कभी छोटे-छोटे कदम भी भारी पड़ जाते हैं। उत्तर प्रदेश के दो जिलों में ऐसा ही कुछ हुआ, जहां बच्चों को दिया गया जीवनरक्षक समझा जाने वाला कदम ही उनकी परेशानी का सबब बन गया। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर दवा खाने के बाद उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद और मैनपुरी में सौ से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई, जिससे हड़कंप मच गया। यह **Deworming Medicine Incident** एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
उत्तर प्रदेश में Deworming Medicine Incident: कृमि मुक्ति दवा खाने के बाद 100 से अधिक बच्चे बीमार, मच गया हड़कंप
फर्रुखाबाद में Deworming Medicine Incident: कैसे बिगड़ी बच्चों की तबीयत?
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के कमालगंज विकास खंड स्थित राठौरा मोहद्दीनपुर गांव में जवाहर लाल प्रेमा देवी विद्यालय में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर एक बड़ा हादसा सामने आया। इस अवसर पर लगभग 150 बच्चों को पेट के कीड़े मारने वाली एल्बेंडाजोल गोली खिलाई गई थी। दवा खाते ही करीब 100 विद्यार्थियों की तबीयत अचानक खराब हो गई। हालांकि, जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में बताया है और सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि तबीयत बिगड़ने के बाद 33 विद्यार्थियों को कमालगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया, जबकि 67 बच्चों को लोहिया अस्पताल ले जाया गया। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी स्वयं लोहिया अस्पताल पहुंचे और बच्चों का हालचाल जाना। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अवनींद्र कुमार ने जानकारी दी कि जिले के सभी विद्यालयों में कृमि नाशक दवा वितरित की गई थी, लेकिन केवल इसी एक स्कूल में बच्चों को सिर दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब सभी बच्चों की हालत में सुधार है। जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने भी पुष्टि की कि सभी बच्चे ठीक हैं और तबीयत खराब होने का अन्य कोई कारण हो सकता है, जिसकी जांच की जा रही है।
मैनपुरी में भी बच्चों पर दिखा दवा का असर
फर्रुखाबाद जैसी ही एक घटना मैनपुरी जिले के नगला कीरतपुर में एक सरकारी कम्पोजिट स्कूल में भी सामने आई। यहां भी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत पेट के कीड़े मारने की दवा एल्बेंडाजोल खाने के बाद करीब दो दर्जन छात्र बीमार हो गए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. आर. सी. गुप्ता ने बताया कि सभी प्रभावित बच्चों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश विद्यार्थियों को छुट्टी दे दी गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
डॉ. गुप्ता ने संवाददाताओं को बताया कि यह घटना राष्ट्रीय कृमि नाशक दिवस पर हुई, जिसे हर साल 10 फरवरी और 10 अगस्त को मनाया जाता है। इस दौरान 2 से 19 साल के बच्चों व युवाओं को पेट के कीड़े मारने की दवा दी जाती है। उन्होंने बताया कि पेट दर्द की शिकायत करने वाले दो बच्चों को कुछ समय के लिए अस्पताल में भर्ती रखा गया। चिकित्सक ने स्पष्ट किया कि “ज्यादातर बच्चे अब बिल्कुल ठीक हैं। यह लापरवाही का मामला नहीं लगता।” उन्होंने करीब दो दर्जन विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच की पुष्टि भी की।
विपक्षी दलों ने उठाए सवाल, जांच की मांग
बच्चों के बीमार पड़ने की इस **Deworming Medicine Incident** को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि मैनपुरी और फर्रुखाबाद में बच्चों के बीमार पड़ने की घटनाएं राज्य में “मेडिकल इमरजेंसी” की स्थिति को दर्शाती हैं। पार्टी ने यह भी दावा किया कि बच्चों को ‘नकली दवाएं’ दी गईं।
आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इस घटना को प्रशासनिक तंत्र की घोर लापरवाही करार दिया है। पार्टी ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी बीच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिषद की ब्रज इकाई के सचिव आनंद कथरिया ने दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ निलंबन और कानूनी कार्रवाई, उच्च स्तरीय जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा उपायों की मांग की है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान: आखिर क्यों चलाया जाता है यह कार्यक्रम?
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल है जो हर साल 10 फरवरी और 10 अगस्त को पूरे देश में चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य 2 से 19 साल के बच्चों और युवाओं को आंतों के कीड़ों (कृमि) से मुक्त करना है। ये कीड़े बच्चों के पोषण और शारीरिक विकास में बाधा डालते हैं, जिससे एनीमिया, कुपोषण और संज्ञानात्मक विकास में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कृमि नाशक दवाएं बच्चों के समग्र स्वास्थ्य और शैक्षिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करती हैं, जिससे वे स्वस्थ और उत्पादक जीवन जी सकें।


