



Vande Mataram: अब हर सरकारी कार्यक्रम और स्कूल में राष्ट्रगान से पहले बजेगा वंदे मातरम, गृह मंत्रालय के नए दिशानिर्देश जारी
Vande Mataram: सदियों से भारत की आत्मा में गुंजता यह गीत, अब एक बार फिर नए नियमों की शृंखला में बंधकर राष्ट्रप्रेम की नई परिभाषा गढ़ने को तैयार है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस राष्ट्रगीत के सम्मान और गायन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन अब सभी सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में अनिवार्य होगा।
Vande Mataram: सम्मान और प्रोटोकॉल का नया अध्याय
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को वंदे मातरम के संबंध में नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार, सभी सरकारी कार्यक्रमों और विद्यालयों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होगा। इसके गायन के दौरान सभी उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। भारत का राष्ट्रगीत वंदे मातरम बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1870 के दशक में लिखा गया था और इसे 1950 में अपनाया गया था। नए नियमों के तहत, पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक पुरस्कार समारोहों और राष्ट्रपति की उपस्थिति में आयोजित होने वाले सभी अन्य कार्यक्रमों में उनके आगमन और प्रस्थान के दौरान राष्ट्रगीत बजाना अनिवार्य होगा। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान को और पुख्ता करेगा।
सिनेमा हॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी राष्ट्रगीत बजाया जाएगा, हालांकि इस दौरान खड़े होना अनिवार्य नहीं किया गया है। इन दिशानिर्देशों में वंदे मातरम के सभी छह श्लोकों को बजाना शामिल है, जिसमें वे चार श्लोक भी सम्मिलित हैं जिन्हें कांग्रेस ने 1937 में हटा दिया था। पहले ‘जन गण मन’ की तरह वंदे मातरम के लिए कोई स्पष्ट राष्ट्रीय प्रोटोकॉल परिभाषित नहीं था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रगीत के सम्मानपूर्वक पालन को औपचारिक रूप देना और आधिकारिक समारोहों, विद्यालयों तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों में एकरूपता सुनिश्चित करना है। यह कदम संसद में राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व पर हुई बहसों के बाद राष्ट्रीय प्रतीकों को लोकप्रिय बनाने और उन पर जोर देने के निरंतर प्रयासों को भी दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक साल तक चलने वाले समारोह का शुभारंभ किया है। यह मुद्दा पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान सत्तारूढ़ सरकार और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच विवाद का मुख्य कारण भी बन गया था। इस नए निर्देश और चारों श्लोकों को दोबारा शामिल करने से राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर विवाद खड़ा होने की संभावना है, खासकर इसलिए क्योंकि पिछले साल इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बहस हुई थी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक प्रतिक्रिया
यह घटना तब हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पूर्ववर्ती जवाहरलाल नेहरू पर मुहम्मद अली जिन्ना का अनुसरण करते हुए इस गीत का विरोध करने का आरोप लगाया था क्योंकि उनका मानना था कि इससे मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। इसके बाद भाजपा ने अपने दावे के समर्थन में नेहरू के पत्र भी साझा किए। राष्ट्रगीत की रचना की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में हुई ‘बहस’ के बाद यह विवाद और भी कटु हो गया था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। इन नए दिशानिर्देशों से राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को बल मिलने की उम्मीद है, हालांकि राजनीतिक दलों के बीच इस पर फिर से चर्चा छिड़ना तय है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हम आपको हर अपडेट देते रहेंगे।





