West Bengal Assembly Elections: चुनावी रणभेरी बज चुकी है, जहां सियासत के खिलाड़ी अपने दांव-पेंच आजमा रहे हैं। पश्चिम बंगाल का सियासी अखाड़ा इन दिनों तप रहा है, जहां हर बयान एक तीर की तरह बरस रहा है।
West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान चरम पर
बिहार के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव अपने चरम पर हैं और भाजपा हर संभव प्रयास कर रही है। ममता बनर्जी लंबे समय से सत्ता की बागडोर संभाले हुए हैं, और उनकी राजनीति की अपनी एक अनूठी शैली है। चौधरी ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) बंगाल में सरकार बनाता है, तो यह निश्चित रूप से राज्य के विकास को एक नई गति प्रदान करेगा। आगामी 2026 विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन और प्रवासियों का बढ़ता आगमन जैसे मुद्दे गर्मागर्म बहस का विषय बन गए हैं। इन मुद्दों पर अगले चुनावों में व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
चुनावी संग्राम तेज होने के साथ ही, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच मंगलवार को तीखी जुबानी जंग देखने को मिली। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में विकास भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है, जिससे राज्य में विकास ठप हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई लाभकारी योजनाएं भी यहां ‘टोल सिंडिकेट’ के शिकार हो गई हैं। शाह ने आगे कहा कि पिछले 14 वर्षों से भय और भ्रष्टाचार ही पश्चिम बंगाल की पहचान बन गए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
West Bengal Assembly Elections: विकास बनाम भ्रष्टाचार का मुद्दा
शाह ने इस बात पर जोर दिया कि 15 अप्रैल, 2026 के बाद, यदि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तो पार्टी बंगाल की समृद्ध विरासत और संस्कृति के पुनरुद्धार का बीड़ा उठाएगी। उन्होंने ‘बंगा भूमि’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भाजपा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी का गठन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने किया था, जो इसी मिट्टी के महान नेता थे। शाह ने आगे कहा कि जहां त्रिपुरा और असम जैसे राज्यों में अवैध घुसपैठ पर सफलतापूर्वक अंकुश लगाया गया है, वहीं पश्चिम बंगाल में यह सिलसिला अभी भी जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी अपने राजनीतिक हितों और वोट बैंक को बढ़ाने के उद्देश्य से घुसपैठ को जारी रहने दे रही हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री के इन आरोपों पर ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने भाजपा नेताओं की तुलना महाभारत के पौराणिक खलनायक दुर्योधन और दुशासन से कर डाली। शाह के दावों का खंडन करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार ने पेट्रापोल और आंदल में बाड़ लगाने के लिए आवश्यक भूमि आवंटित की है। यह दर्शाता है कि उनकी सरकार सीमा सुरक्षा के प्रति गंभीर है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सियासी वार-पलटवार: भविष्य की रणनीति पर नजर
राज्य की राजनीतिक गलियारों में इन बयानों के बाद से गहमागहमी काफी बढ़ गई है। आने वाले समय में यह चुनावी सरगर्मी और तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि सभी पार्टियां 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





