

West Bengal warehouse fire: मौत के तांडव का एक और अध्याय, जहां आग की लपटों ने जिंदगियां निगल लीं। पश्चिम बंगाल के 24 परगना में एक ऐसी ही त्रासदी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया है।
West Bengal warehouse fire: दक्षिण 24 परगना में भीषण आग से 8 की दर्दनाक मौत, कई लापता
West Bengal warehouse fire: कैसे शुरू हुआ मौत का तांडव?
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के नज़ीराबाद इलाके में सोमवार तड़के दो गोदामों में लगी भीषण आग ने कम से कम आठ लोगों की जान ले ली। यह हृदयविदारक घटना कोलकाता के नरेन्द्रपुर थाना क्षेत्र में हुई, जहां एक साथ सटे दो गोदाम अचानक आग की लपटों में घिर गए। आग इतनी विकराल थी कि अग्निशमन कर्मियों को इसे बुझाने में लगभग सात घंटे का लंबा संघर्ष करना पड़ा और इसी दौरान बचाव अभियान भी जारी रहा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती तलाशी अभियान में सुबह करीब पांच बजे घटनास्थल से तीन शव बरामद किए गए। बाद में, मलबे से पांच और शव निकाले गए, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई। बारुईपुर जिले के पुलिस अधीक्षक शुभेंदु कुमार ने बताया कि शव इतनी बुरी तरह झुलस चुके हैं कि उनकी पहचान कर पाना फिलहाल संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मलबा पूरी तरह साफ होने के बाद ही यह सुनिश्चित हो पाएगा कि कहीं और शव तो नहीं फंसे हैं या कोई व्यक्ति मलबे के नीचे दबा तो नहीं है।
शुरुआत में छह लोगों के लापता होने की सूचना मिली थी, लेकिन फंसे हुए लोगों के परिजनों के मुताबिक, यह संख्या 10 से अधिक हो सकती है। इन गोदामों में साज-सज्जा का काम करने वाली एक कंपनी और मोमो बेचने वाली एक इकाई के मजदूर काम करते थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रभावित परिवारों का दर्द और प्रशासन की प्रतिक्रिया
अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस ने घटनास्थल का दौरा कर बचाव अभियान का जायजा लिया। अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन के सवाल पर उन्होंने कहा कि साल में दो बार ऑडिट होता है और खामियों को दूर किया जाता है, लेकिन मालिकों व कंपनी के अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करें। शाम ढलने के साथ ही मृतकों और लापता व्यक्तियों के कई रिश्तेदार घटनास्थल पर जमा हो गए, जो अग्निशमन सेवा और पुलिस अधिकारियों से अपने परिजनों के बारे में जानकारी लेने की गुहार लगा रहे थे।
पूर्वी मेदिनीपुर के तमलुक निवासी तन्मय गिरि ने बताया कि उनके चाचा गोदाम के अंदर बने छोटे कमरों में रहते थे और एक कंपनी में काम करते थे। उन्होंने आखिरी बार रात करीब एक बजे फोन किया था और अब उनका फोन बंद आ रहा है। तन्मय सुबह नौ बजे से उनके फोन का इंतजार कर रहे हैं। एक अन्य युवक ने बताया कि उनके पिता मोमो बनाने वाली इकाई में रात की पाली में काम करने आए थे और तब से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। मृत या लापता सभी लोग पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं।
बिजली मंत्री अरूप बिस्वास ने भी घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि घने धुएं के छंटने के बाद ही यह पुष्टि की जा सकेगी कि कोई अंदर फंसा है या नहीं। उन्होंने बताया कि दीवारों को तोड़ने और धुएं को बाहर निकालने के लिए कोलकाता नगर निगम (KMC) की टीम को बुलाया गया है। बिस्वास ने स्पष्ट किया कि दमकलकर्मी और पुलिसकर्मी जब तक गोदाम के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते, तब तक किसी के फंसे होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
अधिकारियों ने बताया कि आग लगने की सूचना देर रात तीन बजे मिली थी और इसे बुझाने के लिए दमकल की 12 गाड़ियां लगाई गईं। आग पर सुबह करीब 10 बजे काबू पा लिया गया। आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है और इससे हुए नुकसान का आकलन भी जारी है। विपक्षी दल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर ‘इतनी भीषण आग के दौरान आपदा प्रबंधन में असंवेदनशीलता और समन्वय की कमी’ का आरोप लगाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अधिकारी ने कहा कि मंत्री और वरिष्ठ सरकारी व पुलिस अधिकारी गणतंत्र दिवस की छुट्टी मना रहे हैं और गरीबों की उन्हें कोई चिंता नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार जितनी जल्दी जाए, उतना ही अच्छा है। बिस्वास ने अधिकारी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि यह घटना पर राजनीति करने का समय नहीं है। गौरतलब है कि पिछले साल 30 अप्रैल को मध्य कोलकाता के एक होटल में लगी आग में भी 14 लोगों की मौत हो गई थी।

