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Women Reservation Bill: महिला आरक्षण विधेयक सहित 3 अहम बिल आज संसद में होंगे पेश, क्या होगा दक्षिण का?

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Women Reservation Bill: आज संसद का एक विशेष सत्र इतिहास रचने को तैयार है। केंद्र सरकार महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के साथ ही निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। क्या यह बिल देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाएंगे और दक्षिण के राज्यों की चिंताओं का क्या होगा?

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दिल्ली, 16 अप्रैल: केंद्र सरकार आज संसद के विशेष सत्र में देश में अहम बदलाव लाने वाले तीन विधेयक पेश करेगी। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से प्रभावी रूप से लागू करना और इसके लिए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया को सक्रिय करना है। सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन पारित करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया है, जिसका लक्ष्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को अतिशीघ्र अमली जामा पहनाना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। संभव है कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध न करे, लेकिन लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों में बढ़ोतरी के लिए परिसीमन के प्रस्ताव पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव होना तय माना जा रहा है।

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Women Reservation Bill: क्या है सरकार की रणनीति?

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 एक महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव है, जिसका सीधा संबंध लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से है। इस विधेयक के माध्यम से सरकार परिसीमन प्रक्रिया को सक्रिय करना चाहती है, ताकि आरक्षण प्रभावी ढंग से लागू हो सके। सरकार का यह कदम नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को जल्द से जल्द क्रियान्वित करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों में बढ़ोतरी के लिए इस परिसीमन प्रस्ताव पर सियासी घमासान तेज हो सकता है। यह Delimitation प्रक्रिया दक्षिण के राज्यों के लिए विशेष चिंता का विषय बनी हुई है।

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परिसीमन पर क्यों है दक्षिण को चिंता?

दक्षिण के राज्यों को यह आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण नए परिसीमन में उनकी लोकसभा सीटें घट सकती हैं। इस चिंता को सरकार ने पूरी तरह से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि सीटों की बढ़ोतरी हर राज्य के लिए एक समान 50 प्रतिशत होगी। लोकसभा में सीटों की अधिकतम सीमा 850 तय की गई है और किसी भी राज्य की सीटों में कटौती का सवाल ही नहीं उठता। सरकार ने बताया कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए स्पष्ट और नया परिसीमन समय की सबसे बड़ी मांग है।

परिसीमन प्रक्रिया आखिरी प्रकाशित जनगणना (2011) के आधार पर पूरी की जाएगी। राज्यों के लिए सीटों की संख्या पहले से तय नहीं है। हर राज्य के लिए एक परिसीमन आयोग बनेगा, जो राज्य के सभी दलों से चर्चा के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण करेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

विधेयकों पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया

आज लोकसभा में तीनों विधेयकों पर 18 घंटे की चर्चा का समय तय किया गया है। 17 अप्रैल को मतदान के साथ लोकसभा में यह प्रक्रिया पूरी होगी। लोकसभा से पास होने के बाद, 18 अप्रैल को इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा। उल्लेखनीय है कि मौजूदा लोकसभा में 543 सीटें हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद में Women Reservation Bill पर क्या सहमति बनती है और दक्षिण के राज्यों की परिसीमन संबंधी चिंताओं को कैसे दूर किया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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